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Dadi Janki Smriti Diwas : महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल और ब्रह्माकुमारी संस्था में उनके योगदान को नमन

Dadi Janki Smriti Diwas Dadi Janki Smriti Diwas
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Muzaffarpur 27 March : मुजफ्फरपुर में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा Dadi Janki के छठे स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने उनके आध्यात्मिक योगदान, महिला सशक्तिकरण और वैश्विक स्तर पर स्थापित सेवाकेंद्रों को याद किया।

Dadi Janki Smriti Diwas

“प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के कार्यों का संचालन एवं विशाल करने में राजयोगी Dadi Janki दादी जानकी जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.आजादी के तुरंत बाद जाति प्रथा सहित अनेक सामाजिक परंपराओं के बंधन तोड़ते हुए दादी जानकी जी एक सक्रिय महिला आध्यात्मिक नेतृ के रूप में उभरी.दादी जी ने संपूर्ण भारतवर्ष का भ्रमण किया और महिलाओं को आत्मसम्मान का पाठ पढ़ाया तथा उन्हें सिखाया कि वे किस प्रकार अपने समुदाय को नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं.” ये बातें राजयोगिनी बीके रानी दीदी ने पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी जानकी जी के छठी स्मृति दिवस पर कहा.

Dadi Janki Smriti Diwas
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दीदी ने आगे कहा कि बचपन से दादी जी को इस बात की चिंता बनी रहती थी कि वह किस प्रकार दूसरों को जीवन को सुखी बना सकें.बाल्य काल में आप पिताजी के साथ घोड़े गाड़ी में बैठकर शाकाहार का प्रचार किया करती थी और बीमार लोगों की सेवा के साथ-साथ उनका आत्म सम्मान बढ़ाया करती थी. एक महान आध्यात्मिक नेता के रूप में विश्व विख्यात दादी जी के जीवन का केंद्र बिंदु था ईश्वरीय कार्य और ईश्वरीय इच्छा के प्रति दिल और दिमाग से संपूर्ण समर्पण .आप मानती थी कि परमात्मा पवित्र प्रेम और दिव्य विवेक के स्रोत हैं और इन्हीं दोनों गुणों को आपने अपने जीवन का आधार बनाया. इस आध्यात्मिक शक्ति ने आपको विश्व भर की आत्माओं के लिए प्रकाश स्तंभ बना दिया.

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बीके सीता बहन ने कहा सन 1937 में 21 वर्ष की आयु में दादीजी प्रजापिता ब्रह्मा बाबा द्वारा स्थापित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि में आपने स्वयं को समर्पित कर दिया.इसी काल में महिलाओं पर थोपी गई बंदिशों को तोड़ा गया तथा स्वतंत्र जीवन जीने की शुरुआत हुई. 1974 में दादी जी ब्रिटेन पहुंची जहां उन्हें केंद्र की स्थापना एवं संचालन का जिम्मा सौंपा गया. पश्चिमी लोगों को आत्म संयम एवं आध्यात्मिकता को अपनाने के लिए प्रशिक्षित करना था.उनकी विद्वता के कारण अनेक धर्म एवं मतों के अनेक लोगों को जरूरत के समय अपने अंदर साहस को जगाने तथा अपनी मदद स्वयं करने की दृष्टि प्राप्त हुई.

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सर्व के प्रति समदृष्टि रखने के कारण दादी जी ने लाखों लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वह आपस की भेदभाव को भुलाकर मिलजुल कर सौहार्दपूर्ण अपना जीवन यापन करें. उनकी प्रेरणा से दुनिया के 140 देश में ईश्वरीय सेवाकेंद्र की स्थापना हुई. संस्थान के विद्यार्थी एवं शिक्षक शिक्षिकाएं अस्पतालों,विद्यालयों, जेलों,शरणार्थी शिविरों,बेसहारा बच्चों, वेश्याओं एवं व्याधिग्रस्त लोगों की सेवा करते हैं.व्यसनीयों को व्यसन मुक्त करने की कोशिश करते हैं.

अन्तर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों, मूल्य एवं योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर दादी जी ने शुरुआत की, परिणामस्वरुप अनेक लोगों एवं समुदाय के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया.2007 में मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी के निधन के बाद दादी जी संस्था के मुख्य प्रशासिका बनी और 27 मार्च 2020 तक उन्होंने कुशलतापूर्वक संचालन किया. भारत और दुनिया में एकमात्र महिला आध्यात्मिक वक्ता, जिन्होंने विश्व भर में शिक्षण केंद्र स्थापित किये ताकि लोगों के जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को लाकर उनके जीवन को सशक्त बनाया जा सके. विशेष रूप से महिलाओं में आत्मनिर्भरता और नेतृत्व कौशल विकसित किया जा सके.