Muzaffarpur 29 March: Government of India ने बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक प्रो. मनेन्द्र कुमार द्वारा विकसित नीम-तुलसी आधारित एंटीमाइक्रोबियल स्वास्थ्य उपकरण के पेटेंट को प्रकाशित किया, जो इनडोर वायु गुणवत्ता सुधारने और बैक्टीरिया, वायरस व संक्रमण को कम करने में सहायक है।
Government of India : बीआरएबीयू वैज्ञानिक प्रो. मनेन्द्र कुमार
प्रो. मनेन्द्र कुमार द्वारा विकसित ‘‘नीम-तुलसी आधारित पेटेंट’’ का Government of India द्वारा मान्यता एवं प्रकाशन
भारत सरकार एक महत्वपूर्ण नवाचार से संबंधित उपयोगिता पेटेंट का प्रकाशन 27 मार्च को किया गया है। इस नवाचार को बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के सेवानिवृत्त अध्यक्ष, विज्ञान संकाय तथा प्रख्यात शिक्षाविद् एवं वैज्ञानिक प्रो. मनेन्द्र कुमार ने विकसित किया है। इसमें नीम एवं तुलसी के जैव सक्रिय तत्वों पर आधारित नियंत्रित-रिलीज एंटीमाइक्रोबियल स्वास्थ्य उपकरण का विवरण प्रस्तुत किया गया है। यह नवाचार घरेलू, संस्थागत तथा सार्वजनिक स्थलों में इनडोर रोग जनकों की मात्रा को कम करने तथा स्वस्थ वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आविष्कार का उद्देश्यः-
इस आविष्कार का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा पर्यावरण-अनुकूल, सुरक्षित, गैर रासायनिक और दीर्घकालिक प्रभाव वाला स्वास्थ्य उपकरण विकसित करना है जो बंद या अर्ध-बंद स्थानों में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस तथा फंगस की संख्या को कम कर सके। यह उपकरण विशेष रूप से इनडोर वायु गुणवत्ता और सतही स्वच्छता को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है।
तकनीकी विशेषताएँः-
प्रकाशित पेटेंट के अनुसार यह उपकरण निम्न प्रमुख तकनीकी विशेषताओं से युक्त है-
(i) नीम और तुलसी के मानकीकृत जैव सक्रिय अर्क का प्रयोग
(ii) नियंत्रित-रिलीज प्रणाली, जिसमें सक्रिय तत्व धीरे-धीरे और निरंतर वातावरण में प्रसारित होते हैं।
(iii) उपकरण का कार्य तापमान, आर्द्रता और कार्बन डाइआॅक्साइड जैसे पर्यावरणीय संकेतों से प्रभावित हो सकता है, जो मानव उपस्थिति का संकेत देते हैं।
(iv) यह जैव-अपघटनीय और गैर-विषाक्त सामग्री से निर्मित है, जिससे लम्बे समय तक मानव उपयोग में भी सुरक्षा बनी रहती है।
(v) यह रासायनिक कीटाणुओं, कृत्रिम एरोसोल एवं विद्युत आधारित प्रणालियों का एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प प्रस्तुत करता है।
उपयोग के संभावित क्षेत्रः-
यह स्वास्थ्य उपकरण अनेक प्रकार के बंद या अर्धबन्द स्थानों में उपयोगी हो सकता है, जैसे- आवासीय भवन, अस्पताल और स्वास्थ्य संस्थान, विद्यालय तथा शैक्षणिक परिसर, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली तथा कार्यालय एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान।
इन स्थानों पर यह उपकरण हवा और सतहों पर मौजूद सूक्ष्म जीवों की मात्रा कम करके संक्रमण के जोखिम को घटाने एवं श्वसन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।
SKJ Law College में भव्य 'इंडक्शन प्रोग्राम' का आयोजन: नवागंतुक छात्रों का हुआ स्वागत https://t.co/gsmneNoE9S #Muzaffarpur @brabu_ac_in @DineshCRai pic.twitter.com/7Sw2BLYYAb
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) March 28, 2026
सार्वजनिक स्वास्थ्य में संभावित योगदानः-
वर्तमान समय में जब संक्रामक रोगों के प्रसार और इनडोर वायु प्रदूषण को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ा रही है, ऐसे में यह नवाचार प्राकृतिक पौधों के औषधीय गुणों का उपयोग करते हुए सतत और सुरक्षित समाधान प्रदान करता है। नीम और तुलसी भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में लम्बे समय से अपने प्रति जैविक, रोगाणुरोधी और प्रतिरक्षा-वर्धक गुणों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं।
यह तनकीक इन्हीं गुणों को वैज्ञानिक रूप से एक नियंत्रित प्रणाली में उपयोग करके दीर्घकालिक और प्रभावी रोगाणु नियंत्रण का मार्ग प्रशस्त करती है।
भारत सरकार द्वारा इस उपयोगिता पेटेंट के प्रकाशन से यह स्पष्ट होता है कि पौधों पर आधारित ग्रीन टेक्नोलाॅजी और पर्यावरण-स्वास्थ्य इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहन मिल रहा है।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।