Muzaffarpur 12 April : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रो. मनेन्द्र कुमार द्वारा विकसित लीची फसल सुरक्षा हेतु ‘टार्गेटेड मल्टी-लेयर बायोपेस्टिसाइड सिस्टम’ का पेटेंट Government of India ने प्रकाशित किया। यह पर्यावरण-अनुकूल तकनीक कीटनाशक स्प्रे पर निर्भरता घटाकर उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेगी।
Government of India प्रो. मनेन्द्र कुमार का लीची सुरक्षा पेटेंट
प्रो. मनेन्द्र कुमार द्वारा विकसित लीची फसल सुरक्षा हेतु अभिनव ‘‘टार्गेटेड मल्टी-लेयर वायोपेस्टिसाइड सिस्टम’’ का पेटेंट Government of India द्वारा प्रकाशित बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व डीन, विज्ञान संकाय तथा प्रख्यात कीट वैज्ञानिक प्रो. मनेन्द्र कुमार द्वारा विकसित एक अभिनव उपयोगता पेटेंट ‘‘टार्गेटेड मल्टी-लेयर बायोपेस्टिसाइड सिस्टम फाॅर ससटेनेवल लीची पेस्ट मैनेजमेन्ट’’ भारत सरकार द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह शोध कार्य कृषि विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, इसे लीची फसलों में कीट प्रबंधन की जटिल समस्याओं के समाधान की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मना जा रहा है।

यह पेटेंट एक अत्याधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल तथा टिकाउ तकनीक प्रस्तुत करता है, जो लीची बागानों में कीट नियंत्रण के लिए लक्षित, नियंत्रित एवं दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है।
आविष्कार की मुख्य विशेषताएँः
यह प्रणाली तीन परतों पर आधारित हैः
- कीट आकर्षण परतः-
फेरोमोन एवं काईरोमोन आधारित तत्वों द्वारा विशिष्ट कीटों को आकर्षित करती है। - बायोपेस्टिसाइड परतः-
नीम आधारित यौगिकों जैसे नीम तेल एवं लाभकारी फन्जाई जैसे बेउभेरिया बैसीआना को माइक्रोइनकैप्सुलेशन तकनीक द्वारा नियंत्रित रूप से 20-30 दिनों तक रिलीज करती है। - पौध प्रतिरक्षा सक्रियता परतः-
सैलिसिलिक रासिक, जैसमोनिक एसिड एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के माध्यम से पौधों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
यह उपकरण स्प्रे-रहित तकनीक पर आधारित है, जिसे पेड़ों पर लटकाकर, शाखाओं पर क्लिप के रूप में या जड़ों के पास स्थापित किया जा सकता है।
यह प्रणाली यूीव किरणों, वर्षा एवं पर्यावरणीय क्षरण के प्रभावों से सुरक्षित रहती है, जिससे इसकी कार्यक्षमता अधिक समय तक बनी रहती है।
किसानों के लिए लाभः - रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता में कमी
- पर्यावरण प्रदूषण में कमी
- श्रम एवं लागत में बचत
- फलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन में वृद्धि
- जैविक एव अवशेष मुक्त खेती को बढ़ावा
महत्व एवं प्रभावः-
लीची उत्पादन में फल छेदक, सैप बीटल, थ्रिप्स एवं माइटस जैसे कीटों के कारण होने वाले नुकसान को देखते हुए यह आविष्कार अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। यह तकनीक न केवल कीट नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाती है, बल्कि पौधों की आंतरिक प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है, जिससे दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित होती है।
इस उपकरण को अगर बड़े पैमाने पर बनाया जाए तो एक उपकरण पर लगभग 150-200 रूपए लगेंगे तथा एक एकड़ के लीची बगान में 25-30 उपकरण लगाने पर कुल खर्च 4000-6000 रूपए पड़ेंगे। इसके उपयोग से कीटनाशक स्प्रे पर अधिक खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी, श्रम में कमी होगी तथा फसल को कोई नुकसान नहीं होगा।
निष्कर्षः
यह पेटेंट भारतीय कृषि अनुसंधान एवं नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो ‘‘सतत कृषि’’ के लक्ष्य को सशक्त करता है। यह तकनीक भविष्य में लीची उत्पादन के साथ-साथ अन्य बागवानी फसलों के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
बिहार के शिक्षाविद् प्रो. मनेंद्र कुमार के हिंदी उपन्यास ‘फ़र्श से अर्श तक’ को मिला Author Inkwell Award https://t.co/j2OV0pB8bR #news #Muzaffarpur pic.twitter.com/YLdEc8xvql
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) April 9, 2026

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।