Muzaffarpur 24 March : मुजफ्फरपुर के MDDM College में नामवर सिंह की जन्मशती के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित हुई। प्रगतिशील लेखक संघ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के विद्वानों ने नामवर सिंह की आलोचना-दृष्टि, साहित्यिक योगदान और भारतीय वाचिक परम्परा पर विस्तार से चर्चा की।
MDDM College में संगोष्ठी
आज स्नात्तकोत्तर हिन्दी विभाग MDDM College तथा प्रगतिशील लेखक संघ, मुजफ्फरपुर के संयुक्त तत्वावधान में स्मृतिशेष प्रख्यात आलोचक डॉ.नामवर सिंह की जन्मशती वर्ष के अवसर पर ‘नामवर सिंह की आलोचना-दृष्टि’ विषयक आयोजित एक दिवसीय विचार-गोष्ठी/ संगोष्ठी में उक्त बात काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रो.आशीष त्रिपाठी ने कही। उन्होंने आगे कहा कि नामवर जी प्रतिगामी शक्तियों के समक्ष नतमस्तक नहीं होते थे, वरन् तनी हुई रीढ़ के साथ खड़े होते थे, परन्तु यह महत्वपूर्ण है कि वे ज्ञान के सामने नत और विनम्र हो जाते थे। नामवर जी भारतीय वाचिक परम्परा के आधुनिक प्रतिनिधि थे और वे संवाद-प्रतिसंवाद (वाद-विवाद-संवाद) में हमेशा विश्वास रखते थे।

‘नामवर सिंह एक तनी हुई रीढ़ के व्यक्ति थे’-प्रो.आशीष त्रिपाठी
कार्यक्रम का आरम्भ प्राचार्य प्रो.अलका जायसवाल के स्वागत-वक्तव्य से हुआ। उन्होंने सभी आगत अतिथियों का महाविद्यालय परिवार की ओर से आत्मिक स्वागत किया। उद्घाटन-वक्तव्य छत्तीसगढ़ से आये वरिष्ठ पत्रकार व अखिल भारतीय प्रलेस से सम्बद्ध श्री नथमल शर्मा ने दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य से जुड़ाव व्यक्ति को समृद्ध बनाता है तथा साहित्य को पढ़ कर आत्मसात करने और व्यवहार में उतारने की जरूरत है।

विशिष्ट वक्ता एम.एम.टी.टी.सी.बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो.सतीश कुमार राय ने नामवर जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विहंगम दृष्टि डाली और उनके सम्पूर्ण लेखन व उसकी दृष्टि के वैशिष्ट्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशिष्ट वक्ताओं की कड़ी में आगे आर.एन.कालेज, हाजीपुर की वरीय प्राध्यापिका व आलोचिका प्रो.सुनीता गुप्ता ने नामवरजी की आलोचना-दृष्टि के विविध पक्षों को गहराई से रेखांकित किया।

विशिष्ट वक्ता के ही रुप में रामदयालु सिंह महाविद्यालय के स्नातकोतर हिन्दी विभागाध्यक्ष व कवि-आलोचक प्रो.रमेश गुप्ता ने कहा कि नामवर जी ने अपनी रचना-कर्म व साधना से माता-पिता द्वारा दिये नाम को सार्थक व बखूबी सिद्ध किया। वे मूलत: संवेदनशील व सहृदय आलोचक थे, इसी कारण उनकी आलोचना इतनी सरल-सहज व सृजनात्मक बन पड़ी। वे जितने पारम्परिक थे, उतने ही आधुनिक एवं अद्यतन।

अध्यक्षीय भाषण देते हुए वरिष्ठ कवयित्री व कथा-लेखिका प्रो.पूनम सिंह ने नामवर सिंह से जुडे अपने अनेकों आत्मीय संस्मरण सुनाये तथा समाहार करते हुए उन्होंने कहा कि नामवर जी कई पीढियों के निर्माणक रहें और वे परवर्ती नयी पीढ़ी को अभिभावक सदृश स्नेह व मार्गदर्शन दिया।

पूरे कार्यक्रम का सुन्दर-सुव्यवस्थित संचालन हिन्दी विभाग की प्राध्यापिका डॉ.आशा सिंह यादव ने किया एवं आत्मीय धन्यवाद-ज्ञापन प्राध्यापिका डॉ.नूतन कुमारी ने किया तथा पूरे कार्यक्रम का सफल प्रबंधन प्राध्यापक डॉ.राम दुलार सहनी ने किया।
MDDM College में धूमधाम से मनाया गया बिहार दिवस, छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बढ़ाया उत्साह https://t.co/6UOexD6OrO @brabu_ac_in #Muzaffarpur #bihardiwas pic.twitter.com/ra4N5IsNBX
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) March 22, 2026
प्रलेस, मुजफ्फरपुर के सचिव श्री अशोक गुप्त, व प्रलेस से सम्बद्ध पूर्व रेलवे राजभाषा अधिकारी चन्द्रदेव सिंह व कवि श्रवण कुमार तथा विभिन्न महाविद्यालयों व महंथ दर्शनदास महिला महाविद्यालय से प्राध्यापकों की पर्याप्त उपस्थिति रही, जिसमे डॉ.चितरंजन कुमार, डॉ.शिवेन्द्र मौर्य, योगेश, डॉ.अवनीश मिश्र, पम्मी कुमारी एवं महाविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक प्रो.निशिकांति, डॉ.प्रांजलि, डॉ.मधुसुधन, डॉ.वर्षा तिवारी, डॉ.सुनीता, डॉ.नेहा रानी, डॉ.स्वाति, डॉ.दीपमाला, डॉ.श्रीनिवास डॉ.सुधांशु, डॉ.अर्चना गुप्ता, डॉ.पल्लवी आदि प्राध्यापक-प्राध्यापिकाओं तथा छात्र-छात्राओं की ऊर्जावान उपस्थिति रही।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।