श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ : मनुष्य वही है जो दुखियों का दुख समझता है, और परोपकार के लिए सदैव अग्रसर रहता है।
हमें सदैव अच्छे पुरुषों की संगत करना चाहिए, अच्छे लोगों का ही चिंतन करना चाहिए और सदैव अपने मन में सकारात्मक विचारों को ही विचार करना चाहिए, जिससे हमारा मन पवित्र रहता है, हमारे कार्य करने की क्षमता बढ़ती है, एवं हमें भगवत कार्य करने का शुभ अवसर प्राप्त होता है, क्योंकि पात्रता के अनुसार…