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विश्व हिंदी दिवस : श्रीलंका में गूंजी हिंदी की गूंज: डॉ. पंकजवासिनी सम्मानित, 101 साहित्यकारों का हुआ समागम

विश्व हिंदी दिवस श्रीलंका में गूंजी हिंदी की गूंज: डॉ. पंकजवासिनी सम्मानित, 101 साहित्यकारों का हुआ समागम विश्व हिंदी दिवस श्रीलंका में गूंजी हिंदी की गूंज: डॉ. पंकजवासिनी सम्मानित, 101 साहित्यकारों का हुआ समागम
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Colombo 11 January : विश्व हिंदी दिवस पर कोलंबो (श्रीलंका) के स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में सीतामढ़ी की डॉ. पंकजवासिनी को प्रतिष्ठित “भारत-श्रीलंका हिंदी गौरव सम्मान” से नवाजा गया।

विश्व हिंदी दिवस श्रीलंका में गूंजी हिंदी की गूंज: डॉ. पंकजवासिनी सम्मानित

आज विश्व हिंदी दिवस के गौरवशाली अवसर पर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में हिंदी भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार को लेकर एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक समागम का आयोजन किया गया। स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र (भारतीय उच्चायोग भवन) में आयोजित इस भव्य समारोह का नेतृत्व पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी (शिलांग, भारत) और केलणिय विश्वविद्यालय (कोलंबो, श्रीलंका) ने संयुक्त रूप से किया।

प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजी गईं डॉ. पंकजवासिनी

विश्व हिंदी दिवस श्रीलंका में गूंजी हिंदी की गूंज: डॉ. पंकजवासिनी सम्मानित, 101 साहित्यकारों का हुआ समागम
विश्व हिंदी दिवस श्रीलंका में गूंजी हिंदी की गूंज: डॉ. पंकजवासिनी सम्मानित, 101 साहित्यकारों का हुआ समागम

समारोह के दौरान हिंदी भाषा और साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले राम सेवक सिंह महिला कॉलेज (सीतामढ़ी) की हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पंकजवासिनी को “भारत-श्रीलंका हिंदी गौरव सम्मान” से विभूषित किया गया। उन्हें यह सम्मान भारत और श्रीलंका के बीच भाषाई व सांस्कृतिक सेतु बनाने और हिंदी के शैक्षणिक विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए दिया गया।

101 साहित्यकारों का महाकुंभ

इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और श्रीलंका के कुल 101 प्रसिद्ध कवियों, विद्वानों और साहित्यकारों ने अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान काव्य पाठ और ‘हिंदी के वैश्विक परिदृश्य’ पर गंभीर चर्चा की गई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी अब केवल भारत की भाषा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और संस्कृति की एक सशक्त पहचान बन चुकी है।

सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम ने भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ किया है। भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों और केलणिय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने डॉ. पंकजवासिनी सहित सम्मानित होने वाले सभी साहित्यकारों को बधाई देते हुए हिंदी के प्रति उनके समर्पण की सराहना की।

इस सम्मान से न केवल डॉ. पंकजवासिनी और उनके संस्थान, बल्कि संपूर्ण बिहार और भारत के शैक्षणिक जगत में