BRABU के 39 नए डिग्री कॉलेजों से उच्च शिक्षा का विस्तार, शुरुआती नामांकन ने खड़े किए भविष्य की व्यवस्था से जुड़े सवाल
July 21, 2026 | by Goltoo
Muzaffarpur 21 July : BRABU के 39 नए डिग्री कॉलेजों में करीब 11 हजार सीटों पर नामांकन की शुरुआत धीमी है। जानिए शिक्षक नियुक्ति, छात्र संख्या और भविष्य से जुड़े अहम सवाल।
BRABU के 39 नए डिग्री कॉलेजों से उच्च शिक्षा का विस्तार
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) के अंतर्गत 39 नए सरकारी डिग्री कॉलेजों की शुरुआत उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र के करीब स्नातक की पढ़ाई का अवसर देने के उद्देश्य से खोले गए इन कॉलेजों में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हालांकि शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि उपलब्ध सीटों की तुलना में फिलहाल छात्र संख्या कम है। ऐसे में सवाल यह है कि आने वाले दिनों में नामांकन की रफ्तार कितनी बढ़ेगी और छात्र संख्या के अनुरूप शिक्षकों व कर्मचारियों की व्यवस्था किस तरह विकसित की जाएगी।
राज्य में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की पहल के तहत बड़ी संख्या में नए डिग्री कॉलेज शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री द्वारा ऑनलाइन माध्यम से इन कॉलेजों का उद्घाटन किए जाने के बाद BRABU क्षेत्र के 39 कॉलेज भी उच्च शिक्षा के नए केंद्र के रूप में सामने आए हैं। नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ उन विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अब तक स्नातक की पढ़ाई के लिए अपने प्रखंड या जिले से दूर जाना पड़ता था।

39 कॉलेजों में करीब 11 हजार सीटें, अभी शुरुआती दौर में नामांकन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, BRABU के अंतर्गत शुरू हुए 39 नए डिग्री कॉलेजों में छह विषयों में नामांकन की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक विषय में 48-48 सीटें निर्धारित होने से कुल उपलब्ध सीटों की संख्या करीब 11 हजार बनती है।
फिलहाल नामांकन की स्थिति कॉलेज-दर-कॉलेज काफी अलग दिखाई दे रही है। कई कॉलेजों में छात्र संख्या अभी सीमित है, जबकि चंपारण क्षेत्र के कुछ कॉलेजों में नामांकन नहीं होने या बेहद कम होने की स्थिति भी सामने आई है। किसी कॉलेज में दो-चार तो कहीं कुल नामांकन 30 से 40 विद्यार्थियों के आसपास बताया जा रहा है। किसी भी विषय में अभी शत-प्रतिशत सीटें भरने की स्थिति नहीं बनी है।
हालांकि नए संस्थानों के शुरुआती सत्र में कम नामांकन को केवल नकारात्मक नजरिए से देखना उचित नहीं होगा। नए कॉलेजों के बारे में विद्यार्थियों तक जानकारी पहुंचने, शैक्षणिक माहौल विकसित होने, आधारभूत सुविधाएं मजबूत होने और कॉलेजों की पहचान बनने में समय लगता है। कॉलेज खुलने के बाद ही विद्यार्थियों के सामने स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा का नया विकल्प उपलब्ध होता है और धीरे-धीरे उसके प्रति भरोसा तथा आकर्षण बढ़ता है।

कम छात्र संख्या के बीच शिक्षक नियुक्ति का क्या होगा स्वरूप?
नए कॉलेजों में प्राचार्य और बर्सर की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, जबकि शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की बहाली एवं पदस्थापन की प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण चरण में है। इसी बीच कम छात्र संख्या ने एक व्यावहारिक सवाल खड़ा किया है—जिन कॉलेजों में फिलहाल बहुत कम विद्यार्थी हैं, वहां शुरुआत में कितने शिक्षकों की जरूरत होगी?
क्या सभी छह विषयों में एक साथ पूर्ण संख्या में शिक्षकों की तैनाती की जाएगी या नामांकन और छात्र संख्या के आधार पर चरणबद्ध तरीके से पदस्थापन होगा? क्या कम नामांकन वाले कॉलेजों में पहले सीमित शैक्षणिक व्यवस्था के साथ शुरुआत कर बाद में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त शिक्षक दिए जाएंगे? इन सवालों का जवाब भविष्य की नियुक्ति और पदस्थापन नीति से स्पष्ट होगा।
‘पहले कॉलेज खुलेगा, तभी विद्यार्थी आएंगे’—इस पहल का सकारात्मक पक्ष भी महत्वपूर्ण
इस पूरी तस्वीर का एक महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलू यह है कि किसी भी नए शैक्षणिक संस्थान की शुरुआत शून्य से ही होती है। जब तक किसी क्षेत्र में कॉलेज स्थापित नहीं होगा, वहां स्थानीय विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का नया विकल्प भी तैयार नहीं होगा। इसलिए शुरुआती कम नामांकन के बावजूद इन कॉलेजों की स्थापना को भविष्य में उच्च शिक्षा के विस्तार की बुनियाद के रूप में देखा जा सकता है।

विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में कॉलेज खुलने से छात्राओं तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को फायदा हो सकता है। घर के नजदीक स्नातक की पढ़ाई उपलब्ध होने से यात्रा और आवास का खर्च कम होगा तथा उन विद्यार्थियों के लिए भी उच्च शिक्षा जारी रखना आसान हो सकता है, जो दूरी के कारण पढ़ाई छोड़ देते थे।
अब असली चुनौती—कॉलेज खुले हैं, छात्रों तक कैसे पहुंचेगी जानकारी?
नए कॉलेजों की सफलता केवल भवन, सीटों और नियुक्तियों से तय नहीं होगी। विद्यार्थियों और अभिभावकों तक कॉलेजों, उपलब्ध विषयों, नामांकन प्रक्रिया और सुविधाओं की सही जानकारी पहुंचाना भी जरूरी होगा। विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर नामांकन बढ़ाने की संभावनाएं तलाशनी होंगी।

साथ ही यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिन कॉलेजों में नामांकन बेहद कम या शून्य है, वहां इसकी वास्तविक वजह क्या है। क्या विद्यार्थियों को नए कॉलेजों की पर्याप्त जानकारी नहीं मिली? क्या स्थान, परिवहन या आधारभूत सुविधाएं बाधा बन रही हैं? या छात्र पहले से स्थापित कॉलेजों को प्राथमिकता दे रहे हैं? इन कारणों का अध्ययन आगे की नीति को अधिक प्रभावी बना सकता है।
नई शुरुआत के साथ कई सवाल, आने वाले सत्र तय करेंगे सफलता
BRABU के 39 नए डिग्री कॉलेज उच्च शिक्षा के विस्तार की एक बड़ी शुरुआत हैं। फिलहाल कम नामांकन एक चुनौती जरूर है, लेकिन इसे इन संस्थानों की सफलता या असफलता का अंतिम पैमाना नहीं माना जा सकता। आने वाले सत्रों में छात्र संख्या, शिक्षकों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता में कितना सुधार होता है, यही इन कॉलेजों के भविष्य की वास्तविक तस्वीर तय करेगा।
RDS College Muzaffarpur में 78वें स्थापना दिवस के अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन…. #Muzaffarpur @brabu_ac_in @DineshCRai https://t.co/ZUfIS94MBY pic.twitter.com/nRZCcprdcW
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) July 19, 2026
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही हैं—क्या अगले नामांकन चरण में सीटें तेजी से भरेंगी? कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों में शिक्षक पदस्थापन का क्या मॉडल होगा? और विश्वविद्यालय इन नए कॉलेजों को विद्यार्थियों की पहली पसंद बनाने के लिए क्या रणनीति अपनाएगा?
इन सवालों के बीच एक बात स्पष्ट है कि नए कॉलेज खुलने से उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ा है। अब चुनौती इस नए ढांचे को पर्याप्त छात्र संख्या, योग्य शिक्षकों और बेहतर सुविधाओं के साथ एक मजबूत शैक्षणिक व्यवस्था में बदलने की है।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।
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