BRABU के मनोविज्ञान विभाग में Guru Purnima पर मनाया गया भारतीय मनोविज्ञान दिवस
July 29, 2026 | by Goltoo
Muzaffarpur 29 July : BRABU के मनोविज्ञान विभाग में Guru Purnima एवं Indian Psychology Day पर एक दिवसीय संगोष्ठी हुई। छात्रों ने AI, भारतीय ज्ञान परंपरा और योग पर पोस्टर तथा PPT प्रस्तुत की।
Guru Purnima पर मनाया गया भारतीय मनोविज्ञान दिवस
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) के विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग में Indian Psychology Day के उपलक्ष्य में Guru Purnima के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्नातकोत्तर स्तर के द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए भारतीय मनोविज्ञान की समृद्ध परंपरा और उसकी समकालीन प्रासंगिकता को विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से रेखांकित किया।
संगोष्ठी का संयोजन प्रो. रूपाश्री जमुआर ने किया, जबकि अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रजनीश गुप्ता ने की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता एवं अर्थशास्त्र विभाग के प्राध्यापक प्रो. सुनील कुमार ने आमंत्रण के लिए विभाग का आभार व्यक्त किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रजनीश गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति में यदि किसी संबंध को सबसे पवित्र माना गया है तो वह गुरु और शिष्य का संबंध है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन का उद्देश्य बताते हैं, व्यक्ति के भीतर छिपी संभावनाओं को जागृत करते हैं और उसके व्यक्तित्व का निर्माण भी करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान, संस्कार और समर्पण की परंपरा का प्रतीक है।

विभागाधयक्ष की ओर से कहा गया कि भारतीय मनोविज्ञान के प्राचीन ज्ञान-स्रोतों का वैज्ञानिक कसौटियों पर पुनर्पाठ आज की आवश्यकता है। इससे न केवल मनोविज्ञान के क्षेत्र में नई शोध संभावनाएँ विकसित होंगी, बल्कि मानव मन और चेतना को समझने के लिए भारतीय दृष्टिकोण से नई अंतर्दृष्टियों का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
इस अवसर पर विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ आभा रानी सिंहा ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “एक छात्र का आजीवन सबसे सच्चा मित्र पुस्तक होती है।” उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन की निरंतर आदत विकसित करने तथा पुस्तकों को जीवन का अभिन्न साथी बनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार भारतीय संस्कृति में ज्ञान की परंपरा सदैव गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध से समृद्ध होती रही है।उन्होंने अपने धर्म ग्रंथों को पढ़ने का सुझाव भी दिया.

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से शोधपरक पेपर प्रस्तुत किए, जबकि कई विद्यार्थियों ने आकर्षक पोस्टर प्रदर्शनी के माध्यम से भारतीय एवं पाश्चात्य मनोविज्ञान के बीच तुलनात्मक अध्ययन को प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने मन, चित्त, चेतना, आत्मबोध, ध्यान, योग, व्यक्तित्व एवं मानवीय व्यवहार जैसे विषयों को भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में समझाने का प्रयास किया।
पोस्टर एवं PPT प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों ने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि मानव मन और चेतना के अध्ययन की भारतीय परंपरा अत्यंत प्राचीन और व्यापक रही है। वेद, उपनिषद, बौद्ध दर्शन, योग परंपरा तथा विभिन्न भारतीय धर्मग्रंथों एवं दार्शनिक परंपराओं में मनुष्य के मन, व्यवहार और चेतना से संबंधित अनेक ऐसी अवधारणाएँ विद्यमान हैं, जिनका आधुनिक वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुनः अध्ययन किया जा सकता है।

विद्यार्थियों ने भारतीय और पाश्चात्य मनोविज्ञान के बीच अंतर के साथ-साथ उनके संभावित समन्वय और संवाद को भी रेखांकित किया। प्रस्तुतियों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारतीय मनोविज्ञान को केवल आध्यात्मिक विरासत के रूप में देखने के बजाय आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए।
Bharti Shikshak PRashikshan Mahavidyalay में ‘सत्रारंभ’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन, नवप्रशिक्षुओं का हुआ आत्मीय स्वागत https://t.co/GQGOsrkKuP #muzaffarpur @brabu_ac_in pic.twitter.com/BSYPGZ5HLm
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) July 28, 2026
डॉ विकास कुमार ने शोधार्थियों और विद्यार्थियों के शोध पत्र प्रस्तुतीकरण पर सराहना जताते हुए कहा कि शोधार्थियों और विद्यार्थियों के अधिकांश शोध भारतीय मनोविज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित थी।
संगोष्ठी के दौरान छात्र-छात्राओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु पूर्णिमा तथा “योग कैसे आज Yoga बन गया” जैसे समसामयिक विषयों पर पावर प्वाइंट (PPT) के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए। सौरभ, अंतरा, श्रुति और गुंजा सहित अन्य विद्यार्थियों ने अपने शोधपरक एवं विचारोत्तेजक प्रस्तुतिकरण से उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं, पीजी छात्र शुभम कुमार ने संत कबीर का प्रसिद्ध दोहा “दो दिन की ज़िंदगी और दो दिन का मेला…” गिटार की मधुर धुनों के साथ प्रस्तुत कर कार्यक्रम में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण का सृजन किया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति को शिक्षकों और विद्यार्थियों ने खूब सराहा।
प्रो. सुनीता कुमारी एवं डॉ प्रो विकाश कुमार ने छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन किया. कार्यक्रम के अंत में प्रो. ऋतू कुमारी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस मौके पर विभागाध्यक्ष प्रो रजनीश गुप्ता, समन्वयक रूपाश्री जमुआर, प्रो सुनीता कुमारी, प्रो विकाश कुमार,प्रो. ऋतू कुमारी आदि उपस्थित रहे. इस अवसर पर विभाग के कर्मी जितेंद्र कुमार, अभय शंकर सिंह,राहुल सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।
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