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BRABU का 11 अगस्त का आदेश ; स्थापित कॉलेजों से क्लर्क, सहायक और लेखा कर्मियों को नए कॉलेजों में भेजा गया, यात्रा भत्ता भी नहीं मिलेगा

August 11, 2026 | by Goltoo

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Muzaffarpur 11 August : BRABU ने 39 नए सरकारी डिग्री कॉलेजों के लिए 39 गैर-शिक्षकेतर कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति की। कर्मचारियों को तीन दिन में योगदान देना होगा।

बिहार में 39 नए राजकीय डिग्री महाविद्यालयों को प्रशासनिक रूप से सक्रिय करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) की ओर से 11 अगस्त 2026 को जारी आदेश के तहत विश्वविद्यालय क्षेत्र के विभिन्न स्थापित अंगीभूत कॉलेजों से 39 गैर-शिक्षकेतर कर्मचारियों को नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में प्रतिनियुक्त किया गया है। कर्मचारियों को नई जगह पर तीन कार्यदिवस के भीतर योगदान देने का निर्देश दिया गया है। यह प्रतिनियुक्ति शैक्षणिक सत्र 2026-30 के दौरान नए कॉलेजों में कार्यालय संबंधी कार्यों के संचालन के लिए की गई है।

विश्वविद्यालय के कुलपति के निर्देश तथा अप्रैल 2026 में लिए गए राज्य स्तरीय निर्णयों के आधार पर जारी इस आदेश में कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नए कॉलेजों में भेजने की बात कही गई है। प्रतिनियुक्त कर्मचारियों में सहायक, लिपिक और लेखा संबंधी कार्यों से जुड़े कर्मी शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य नए खुले 39 राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में प्रारंभिक प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करना और कार्यालय संबंधी कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करना है।

BRABU news
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तीन कार्यदिवस में योगदान की चुनौती

आदेश में कर्मचारियों को नई प्रतिनियुक्ति स्थल पर तीन कार्यदिवस के भीतर योगदान देने को कहा गया है। ऐसे में कई कर्मचारियों के लिए यह समय-सीमा व्यावहारिक चुनौती बन सकती है, क्योंकि प्रतिनियुक्ति कई मामलों में एक जिले से दूसरे जिले तक की गई है। उदाहरण के तौर पर जे.एल.एन.एम. कॉलेज, घोड़ासहन में कार्यरत सहायक अनिल कुमार सिंह को पश्चिम चंपारण के पिपरासी स्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया है। इसी तरह मुजफ्फरपुर के आरडीएस कॉलेज से कार्यरत सहायक कार्तिक पूर्णेंदु को पूर्वी चंपारण के मेहसी स्थित नए कॉलेज में भेजा गया है।

यात्रा भत्ता नहीं मिलने से कर्मचारियों पर अतिरिक्त भार

आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रतिनियुक्ति के लिए कर्मचारियों को टीए/डीए यानी यात्रा एवं दैनिक भत्ता देय नहीं होगा। यानी नई जगह पर पहुंचने और प्रतिनियुक्ति से संबंधित यात्रा का खर्च कर्मचारियों को स्वयं वहन करना होगा। अनिवार्य प्रशासनिक प्रतिनियुक्ति के साथ यात्रा भत्ता नहीं मिलने का प्रावधान कर्मचारियों के लिए आर्थिक चुनौती पैदा कर सकता है, विशेषकर उन मामलों में जहां नई तैनाती दूरस्थ या दूसरे जिले के ग्रामीण क्षेत्र में है।

BRABU का 11 अगस्त का आदेश
BRABU का 11 अगस्त का आदेश

छह जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंची प्रशासनिक कवायद

39 कर्मचारियों की यह प्रतिनियुक्ति पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली और पश्चिम चंपारण के विभिन्न प्रखंडों में स्थापित किए गए राजकीय डिग्री महाविद्यालयों से जुड़ी है। पिपरासी और भितहां जैसे पश्चिम चंपारण के दूरस्थ क्षेत्रों से लेकर पूर्वी चंपारण के मेहसी जैसे प्रखंडों तक नए कॉलेजों की प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी करने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के संस्थानों को जल्द से जल्द कार्यशील बनाना है।

नए कॉलेजों की व्यवस्था के लिए अस्थायी समाधान

इन कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति फिलहाल एक अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था के रूप में की गई है। नए कॉलेजों में स्थायी गैर-शिक्षकेतर कर्मचारियों की नियुक्ति होने तक स्थापित कॉलेजों के कर्मचारियों के सहारे कार्यालयी कामकाज चलाने की व्यवस्था की गई है। इससे एक ओर नए कॉलेजों में तत्काल प्रशासनिक ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर पुराने कॉलेजों में कर्मचारियों की उपलब्धता और कार्यभार को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

बिहार सरकार द्वारा प्रखंड स्तर तक उच्च शिक्षा का विस्तार करने की दिशा में 39 नए राजकीय डिग्री महाविद्यालयों की स्थापना महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इन संस्थानों को लंबे समय तक प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए स्थायी शिक्षकेतर कर्मचारियों की नियुक्ति, पर्याप्त आधारभूत सुविधाएं और स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक होगी। फिलहाल BRABU की यह प्रतिनियुक्ति नए कॉलेजों को शुरुआती स्तर पर प्रशासनिक आधार उपलब्ध कराने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

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