Muzaffarpur 6 February : मुजफ्फरपुर के खरौना एवं पानापुर (कुढ़नी प्रखंड) स्थित Hecure Agro Plant की टिश्यू कल्चर लैब का जिला पदाधिकारी ने निरीक्षण किया। उन्नत पौध उत्पादन, किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
डीएम सुब्रत कुमार सेन : Hecure Agro Plant – टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला
मुजफ्फरपुर जिले में कृषि को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कुढ़नी प्रखंड के खरौना स्थित हीक्योर एग्रो प्लांट प्राइवेट लिमिटेड की टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रयोगशाला में तैयार किए जा रहे उन्नत और उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की प्रक्रिया को देखा और अधिकारियों से किसानों को होने वाले लाभ की जानकारी ली।
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आय
जिलाधिकारी ने कहा कि टिश्यू कल्चर तकनीक के माध्यम से तैयार पौधे रोगमुक्त, गुणवत्तापूर्ण और तेजी से बढ़ने वाले होते हैं। इससे किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन व आय दोनों बढ़ेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना है।

फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट से मान्यता प्राप्त लैब
प्लांट के निदेशक श्री अनिल कुमार सिंह ने बताया कि हीक्योर एग्रो प्लांट प्राइवेट लिमिटेड को फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) से मान्यता प्राप्त है।
यहां वर्तमान में क्रॉम्बिया (क्लोनल यूकेलिप्टस) और नीम का बड़े पैमाने पर टिश्यू कल्चर के माध्यम से उत्पादन किया जा रहा है। टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे रोगमुक्त होते हैं, तेजी से बढ़ते हैं और किसानों को अधिक मुनाफा दिलाते हैं।
निवेश और रोजगार को मिल रहा बढ़ावा
हीक्योर एग्रो प्लांट जैसे संस्थान जिले में निवेश और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर किसानों को उन्नत पौधे उपलब्ध होने से आधुनिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।

1 एकड़ से 10 वर्षों में 1 करोड़ तक की आय की संभावना
निदेशक के अनुसार, यदि किसान क्रॉम्बिया की खेती 1 एकड़ भूमि में करते हैं, तो लगभग 10 वर्षों में एक करोड़ रुपये तक का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
इसके अलावा टर्की, अफगानिस्तान और ईरान की डायना प्रजाति के अंजीर का भी टिश्यू कल्चर के माध्यम से उत्पादन किया जा रहा है।
किसानों के लिए प्रेरणा केंद्र बन रही प्रयोगशाला
प्रयोगशाला में कई उन्नत प्रजातियों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें फलदार, लकड़ी और औषधीय पौधे शामिल हैं। प्रदर्शन प्लांटेशन के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती के लाभ प्रत्यक्ष रूप से दिखाए जा रहे हैं, जिससे वे नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
कई किसानों ने इस संस्थान से प्रेरणा लेकर सीडलेस नींबू की खेती शुरू की है और कम समय में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया है, जिससे किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
एक स्टेम सेल से तैयार होते हैं सैकड़ों पौधे
टिश्यू कल्चर तकनीक की विशेषता यह है कि एक स्टेम सेल से सैकड़ों पौधे तैयार किए जा सकते हैं। पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्व वैज्ञानिक विधि से उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता बेहतर होती है।
सैकड़ों उन्नत प्रजातियों का उत्पादन
इस लैब में सीडलेस नींबू, मालभोग केला, अनार, सागवान, बैंबू, गम्हार, मौसमी, आंवला, स्ट्रॉबेरी, एवोकाडो सहित कई फसलों और पौधों की उन्नत प्रजातियां विकसित की जा रही हैं।
इन पौधों की खासियत है कि कम लागत, कम समय और अधिक आमदनी संभव है।
Bihar University मनोविज्ञान विभाग द्वारा 6 फरवरी को एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन https://t.co/YZ3az0cyI5 #Muzaffarpur #news@brabu_ac_in @DineshCRai pic.twitter.com/RV896617Aw
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) February 5, 2026
कृषि में बदलाव की नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि टिश्यू कल्चर तकनीक कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे सीमित भूमि में भी अधिक उत्पादन संभव है और किसानों को स्थायी आय का स्रोत मिल सकता है।
जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि ऐसी वैज्ञानिक पहलों को प्रशासन हर संभव सहयोग देगा, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक खेती को अपनाएं।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।