Muzaffarpur 13 February : Bharti Shikshak Prashikshan Mahavidyalay में 13 फरवरी 2026 को आयोजित प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन के तीसरे दिन शिक्षा के विविध आयामों पर गहन मंथन हुआ। दिन का प्रथम सत्र अत्यंत प्रेरणादायी एवं उद्देश्यपूर्ण रहा। मंच पर प्रदेश सचिव श्री रामलाल सिंह जी, पूर्व पूर्णकालिक शिक्षक एवं प्रधानाचार्य श्री मिथिलेश कुमार सिंह जी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री ख्याली राम जी तथा प्रख्यात शिक्षाविद् श्री राजदेव सिंह जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
Bharti Shikshak Prashikshan Mahavidyalay प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन
श्री राजदेव सिंह जी ने लोक शिक्षा समिति एवं बिहार की शिक्षा-संस्कृति को समृद्ध करने हेतु अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने हाजीपुर स्थित +2 विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए विद्यालयों में समर्पित शिक्षण पर बल दिया। क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री ख्याली राम जी के बौद्धिक उद्बोधन ने उपस्थित प्रधानाचार्यों को स्पष्ट शैक्षिक दिशा प्रदान की।

विद्यालयों प्रभावी क्रियान्वयन से साकार होगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति : देशराज शर्मा
द्वितीय सत्र में विद्या भारती के अखिल भारतीय महामंत्री एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षाविद् माननीय श्री देशराज शर्मा जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी नीति की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। दूरदृष्टि-आधारित योजना, स्पष्ट कार्य-योजना, सूचना-प्रसार तथा कक्षा-कक्ष में व्यवहारिक अनुपालन अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक पीढ़ी लगभग 15 वर्षों की होती है, अतः शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को निरंतर नवाचारी एवं ऊर्जावान बने रहना चाहिए।

शर्मा जी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय मूल्यों और भारतीय आत्मा से जुड़ी ऐतिहासिक पहल है, जिसमें 1986 की शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 के अनुभवों को समाहित किया गया है। उन्होंने आग्रह किया कि आगामी एक वर्ष में नीति के विभिन्न पक्षों पर गंभीर चिंतन कर विद्यालय स्तर पर योजनाबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि प्रत्येक विद्यार्थी विशिष्ट है—यह बात व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए नवाचार, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन तथा गतिविधि-आधारित शिक्षण आवश्यक है। प्रधानाचार्य की भूमिका को केंद्रीय बताते हुए उन्होंने कहा कि नेतृत्व में संचार, सहयोग, सामूहिकता और जीवन-कौशल का समावेश होना चाहिए। परीक्षा-केंद्रित व्यवस्था के स्थान पर मूल्यांकन-आधारित प्रणाली को उन्होंने समय की आवश्यकता बताया।

भाषा शिक्षा, मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षण, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2022, स्थानीय परिवेश-आधारित शिक्षा, कौशल विकास, समावेशी शिक्षा, पर्यावरण चेतना, संगणक ज्ञान एवं भारत-बोध जैसे विषयों को उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। सुकरात, प्लेटो और अरस्तु के उदाहरणों से उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय का वातावरण ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करता है।
भोजन-अवकाश के दौरान “पाँच परिवर्तन” के अंतर्गत ‘कुटुंब प्रबोधन’ विषय पर मातृ-भोजन कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ आत्मीय सहभोज हुआ। यह पहल सामाजिक समरसता और राष्ट्रबोध का सशक्त उदाहरण बनी।
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— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) February 11, 2026
दिनभर शिक्षा के गुणात्मक विकास, शिक्षक-प्रधानाचार्य जीवन में सकारात्मक परिवर्तन तथा सामाजिक सहभागिता पर विचार-विमर्श हुआ। अंत में श्री देशराज शर्मा जी ने सभी प्रधानाचार्यों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को योजनाबद्ध रूप से लागू करें, ताकि वर्ष 2040 तक भारत की शिक्षा व्यवस्था विश्व के लिए आदर्श बन सकें।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।