Muzaffarpur 22 September : BRABU के अर्थशास्त्र विभाग में रिसर्च मेथडोलॉजी वर्कशॉप के दूसरे दिन स्टेशनैरिटी, इकोनोमेट्रिक्स और सांख्यिकीय परीक्षणों पर प्रशिक्षण दिया गया।
BRABU में रिसर्च मेथडोलॉजी वर्कशॉप का दूसरा दिन
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU), मुजफ्फरपुर के अर्थशास्त्र विभाग में आयोजित तीन दिवसीय रिसर्च मेथडोलॉजी वर्कशॉप के दूसरे दिन शोधार्थियों और शिक्षकों को आधुनिक सांख्यिकीय एवं इकोनोमेट्रिक तकनीकों की जानकारी दी गई। 21 से 23 सितंबर तक चल रहे इस कार्यशाला का उद्देश्य शोध में बेहतर पद्धति, डेटा विश्लेषण और सांख्यिकीय परीक्षण की समझ विकसित करना है।

टाइम सीरीज डेटा और स्टेशनैरिटी पर विशेष सत्र
कार्यशाला के दूसरे दिन सुबह के सत्र में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के प्रो. एम.डी. तारिक ने टाइम सीरीज डेटा में Stationarity की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि समय के साथ डेटा के विश्लेषण में उसके औसत, विचरण और अन्य सांख्यिकीय गुणों की स्थिरता को समझना महत्वपूर्ण है।
सत्र में Non-Stationary Data से उत्पन्न होने वाली Spurious Regression यानी भ्रामक सांख्यिकीय संबंधों पर भी चर्चा हुई। शोधार्थियों को समझाया गया कि बिना उचित परीक्षण के दो ऐसे चर भी आपस में संबंधित दिखाई दे सकते हैं, जिनके बीच वास्तविक संबंध नहीं हो। सत्र के बाद प्रतिभागी काजल कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

पैरामीट्रिक और नॉन-पैरामीट्रिक टेस्ट की समझ
दोपहर के सत्र में एल.एन. मिश्रा कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट, मुजफ्फरपुर के डॉ. नीरज कुमार ने शोध में सांख्यिकीय परीक्षणों के चयन पर दो तकनीकी व्याख्यान दिए। उन्होंने Parametric और Non-Parametric Tests के बीच अंतर, उनके उपयोग और आवश्यक शर्तों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि पैरामीट्रिक परीक्षण सामान्य वितरण जैसी कुछ सांख्यिकीय मान्यताओं पर आधारित होते हैं, जबकि नॉन-पैरामीट्रिक परीक्षण ऐसे डेटा के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जहां ये मान्यताएं पूरी न हों या नमूना आकार सीमित हो। सत्र के अंत में प्रतिभागी अनुप्रिया कुमारी ने उपस्थित विशेषज्ञों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर
कार्यशाला की खास बात यह रही कि प्रतिभागियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने और अपने शोध से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करने का अवसर मिला। आयोजन का उद्देश्य शोधार्थियों और शिक्षकों को आधुनिक शोध तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के साथ-साथ ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए मंच उपलब्ध कराना रहा।
प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने शोध डिजाइन, डेटा विश्लेषण और सांख्यिकीय पद्धतियों से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर मिला।
शिक्षकों और संस्थानों के सहयोग से आयोजन
कार्यक्रम की शुरुआत में विभागाध्यक्ष प्रो. चंचल चरण ने आमंत्रित विशेषज्ञों को स्मृति चिह्न और शॉल देकर सम्मानित किया। कार्यशाला का संचालन आयोजन सचिव डॉ. मंजरी आनंद ने किया।
कार्यक्रम में प्रो. जफर, प्रो. संजय कुमार, डॉ. रोजी सुलोचना, डॉ. रितु वर्मा, डॉ. अनीता कुमारी और डॉ. अमर कृष्ण सहित अन्य वरिष्ठ शिक्षक मौजूद रहे। BRABU, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और एल.एन. मिश्रा कॉलेज के विशेषज्ञों की भागीदारी ने शोधार्थियों को विभिन्न संस्थानों के अकादमिक अनुभवों से सीखने का अवसर दिया।
Muzaffarpur के कॉलेजों में शिक्षक संवाद, प्रो. संजय कुमार सिंह ने सुनीं समस्याएं; बोले- सड़क से सदन तक जारी रहेगा संघर्ष https://t.co/WRyepqquWr #Muzaffarpur #news pic.twitter.com/8vtwmm1Tlu
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) September 21, 2026
शोध की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर जोर
वर्कशॉप के दूसरे दिन के सत्रों में इस बात पर जोर रहा कि बेहतर शोध के लिए केवल डेटा जुटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही शोध पद्धति, उपयुक्त सांख्यिकीय परीक्षण और डेटा की प्रकृति की समझ भी जरूरी है। इकोनोमेट्रिक्स और सांख्यिकीय तकनीकों के व्यावहारिक प्रशिक्षण से शोधार्थियों को अपने अकादमिक कार्य को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।

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