Headlines

LS College में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 63वीं पुण्यतिथि मनाई गई, प्रो. कनुप्रिया ने दी श्रद्धांजलि

LS College में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 63वीं पुण्यतिथि LS College में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 63वीं पुण्यतिथि
Advertisements

Muzaffarpur 28 February : मुजफ्फरपुर के LS College में भारत के प्रथम राष्ट्रपति Rajendra Prasad की 63वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। प्राचार्य प्रो. कनुप्रिया ने कहा कि डॉ. प्रसाद के आदर्शों पर चलकर ही सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण संभव है।

LS College में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 63वीं पुण्यतिथि

LS College के प्रांगण में देश के प्रथम राष्ट्रपति और प्रखर स्वाधीनता सेनानी देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 63वीं पुण्यतिथि अत्यंत गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कॉलेज स्थित ‘डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति पार्क’ में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. कनुप्रिया ने की। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में अपनी भावांजलि अर्पित की।

LS College में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 63वीं पुण्यतिथि
LS College में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 63वीं पुण्यतिथि

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. कनुप्रिया एवं वरीय सहयोगियों द्वारा डॉ. प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। अपने संबोधन में प्रो. कनुप्रिया ने कहा कि लंगट सिंह कॉलेज के लिए यह चिरस्थायी गौरव का विषय है कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महान राष्ट्रनिर्माता यहाँ शिक्षक रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. प्रसाद न केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ और विद्वान थे, बल्कि वे सादगी और उच्च नैतिक मूल्यों के अनुपम उदाहरण थे।

स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान निर्माण और फिर स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में देश को दिशा देने तक उनका योगदान अतुलनीय है। प्रो. कनुप्रिया ने कॉलेज के साथ उनके आत्मीय संबंधों पर कहा कि उनके आदर्श आज भी इस संस्थान में प्रासंगिक हैं। उनके द्वारा दिखाए गए पथ पर चलकर ही हम एक सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।

अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. एस. आर. चतुर्वेदी ने डॉ. प्रसाद के शिक्षक स्वरूप को नमन करते हुए कहा कि अध्यापन एक पवित्र सेवा है और डॉ. प्रसाद ने यहाँ शिक्षा की जो लौ जलाई थी, वह आज भी हमारा पथ आलोकित कर रही है। अवसर पर उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया। श्रद्धांजलि देने वालों में प्रो. विजय कुमार, डॉ. वेदप्रकाश दुबे, डॉ. अर्धेंदु, डॉ. शशिकांत पाण्डेय, डॉ. स्वीटी सुप्रिया, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. आनन्द कुमार सिंह, गुरु प्रसाद कश्यप, दीपक कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।