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MPS Science College Muzaffarpur में “भारतीय भाषा परिवार और भाषाई एकता” पर राष्ट्रीय सेमिनार सम्पन्न

MPS Science College Muzaffarpur में “भारतीय भाषा परिवार और भाषाई एकता” पर राष्ट्रीय सेमिनार सम्पन्न MPS Science College Muzaffarpur में “भारतीय भाषा परिवार और भाषाई एकता” पर राष्ट्रीय सेमिनार सम्पन्न
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Muzaffarpur 5 January : MPS Science College Muzaffarpur में भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में भाषाई एकता, भारतीय ज्ञान परंपरा और मातृभाषाओं की भूमिका पर गहन विमर्श हुआ।

MPS Science College Muzaffarpur राष्ट्रीय सेमिनार सम्पन्न

MPS Science College Muzaffarpur में 5 जनवरी 2026 को महाविद्यालय और भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय भाषा परिवार और भाषाई एकता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम चार चरणों में सम्पन्न हुआ, जिसमें प्रथम चरण में उद्घाटन समारोह, द्वितीय एवं तृतीय चरण में तकनीकी सत्र तथा चतुर्थ चरण में समापन सत्र आयोजित किया गया।

MPS Science College Muzaffarpur में “भारतीय भाषा परिवार और भाषाई एकता” पर राष्ट्रीय सेमिनार सम्पन्न
MPS Science College Muzaffarpur में “भारतीय भाषा परिवार और भाषाई एकता” पर राष्ट्रीय सेमिनार सम्पन्न

कार्यक्रम का उद्घाटन बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय ने दीप प्रज्वलन, मंत्रोच्चार एवं विश्वविद्यालय के कुल गीत के वादन के साथ किया। उपस्थित गणमान्य अतिथियों का सम्मान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजीव कुमार एवं अन्य सदस्यों द्वारा पुष्प गुच्छ, मोमेंटो और शॉल देकर किया गया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि हम राष्ट्र निर्माण के स्वर्णिम काल में हैं, जहां भाषाई एकता भारत की बहुभाषी संस्कृति को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) मोहम्मद जहांगीर वारसी, भाषा विज्ञान विभाग, ए.एम.यू., अलीगढ़ एवं अध्यक्ष, लिंग्विस्टिक सोसाइटी ऑफ इंडिया ने भारतीय भाषा समिति द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों का विमोचन कुलपति के कर-कमलों से कराया। उन्होंने पाणिनी रचित “अष्टाध्यायी” की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत विश्व में सर्वाधिक भाषाओं को जानने वाला देश है। उन्होंने संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी बताते हुए ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना में स्थानीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित किया।

विशिष्ट अतिथि महाराजगंज कॉलेज, महाराजगंज के प्राचार्य डॉ. सुजीत कुमार चौधरी ने कहा कि कोई भी राष्ट्र अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही प्रगति कर सकता है। उद्घाटन सत्र का मंच संचालन डॉ. आशुतोष तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नवीन कुमार ने किया।

MPS Science College Muzaffarpur तकनीकी सत्र:
प्रथम तकनीकी सत्र में पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनोज कुमार ने भारतीय भाषाओं के इतिहास पर चर्चा करते हुए बताया कि पिछले 200 वर्षों में विदेशी आक्रमणों के कारण भारतीय भाषाओं की स्थिति प्रभावित हुई। लंगट सिंह महाविद्यालय के भोजपुरी विभागाध्यक्ष डॉ. जयकांत सिंह ने अंग्रेजी के बढ़ते प्रयोग पर खेद जताते हुए अपनी भाषा पर गर्व करने की अपील की। ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. ममता रानी ने वैश्वीकरण में अंग्रेजी के महत्व को स्वीकारते हुए हिंदी को राजभाषा के साथ राष्ट्रभाषा घोषित करने का सुझाव दिया तथा नई शिक्षा नीति 2020 से मातृभाषाओं को मिले प्रोत्साहन की चर्चा की।

इस सत्र में डॉ. कृष्ण पासवान, आर.सी.एस. कॉलेज, मंझौल द्वारा प्रस्तुत शोध पत्र में साहित्यकार फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ के साहित्य में भारतीय भाषाओं के प्रभावी प्रयोग पर प्रकाश डाला गया। डॉ. राजेश्वर कुमार, हिंदी प्राध्यापक, लंगट सिंह कॉलेज ने संस्कृत को भारतीय भाषाओं को जोड़ने वाली आधारशिला बताया। इस सत्र की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. राजीव कुमार ने की। मंच संचालन डॉ. अरविन्द कुमार सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिशिर कुमार ने किया।

द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता पूर्व कुलपति डॉ. अमरेन्द्र कुमार यादव ने की। उन्होंने शिक्षा, विशेषकर तकनीकी शिक्षा पर बल देते हुए उच्च शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने की आवश्यकता बताई। डॉ. प्रमोद कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर विचार रखे। डॉ. श्रीप्रकाश पाण्डेय ने राष्ट्र निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा और भाषाई उपयोगिता पर बल दिया। डॉ. ज्योति नारायण सिंह ने भाषाओं के पारस्परिक संबंधों, स्थानीय से वैश्विक स्तर तक भाषा की भूमिका तथा विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में भाषा के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को पुष्प गुच्छ, मोमेंटो एवं शॉल देकर सम्मानित किया गया। इस राष्ट्रीय सेमिनार में सवा सौ से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। समापन के उपरांत सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा डॉ. वंदना श्रीवास्तव द्वारा रचित पुस्तक “भोजपुरी कला के बहाने” का विमोचन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।

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