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कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, Muzaffarpur के तत्त्वावधान में “प्रेरणा पर्व” का आयोजन

कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, Muzaffarpur के तत्त्वावधान में "प्रेरणा पर्व" का आयोजन कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, Muzaffarpur के तत्त्वावधान में "प्रेरणा पर्व" का आयोजन
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Muzaffarpur 5 January : कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, Muzaffarpur के तत्त्वावधान में “प्रेरणा पर्व” के रूप कवि , नाटककार, कहानीकार,समीक्षक एवं संपादक डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह: 71 वाँ जन्मदिवस समारोह का आयोजन हुआ जिसके अध्यक्षीय भाषण में डॉ. रामप्रवेश सिंह (पूर्व विश्वविद्यालय हिंदी विभागाध्यक्ष, बी. आर. ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर) ने डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह एक सिद्ध साहित्यकार ही नहीं , एक साहित्यिक गुरु भी हैं ।

जागृति संस्थान, Muzaffarpur डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह: जन्मदिवस समारोह

अपनी रचनाशीलता के प्रकाश से उन्होंने अनेक साहित्यकारों का निर्माण किया है। विशिष्ट अतिथि डॉ रामेश्वर द्विवेदी ने कहा कि डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह ने अपनी तकलीफों के माध्यम से साहित्य को जिया है। विशिष्ट अतिथि (पूर्व विश्वविद्यालय हिंदी विभागाध्यक्ष, ललित नारायण मिश्र मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा) डॉ राजेन्द्र साह ने कहा कि डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह एक साहित्य साधक हैं जिनकी रचनाओं में अनेक विमर्शों की सरणि निकलती है।

कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, Muzaffarpur के तत्त्वावधान में "प्रेरणा पर्व" का आयोजन
कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, Muzaffarpur के तत्त्वावधान में “प्रेरणा पर्व” का आयोजन

विशिष्ट अतिथि अवकाश प्राप्त स्नातकोत्तर शिक्षक डॉ उमेशचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह की कहानी “पहचान” की समीक्षा करते हुए कहा कि पहचान का संकट और संघर्ष वर्तमान दौर की समस्या है। इस कहानी में डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह की जिंदगी की छाया नजर आती है ।

एम पी साइंस काँलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ अमरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह ने ईमानदारी, तत्परता और कठोर परिश्रम द्वारा असंभव को संभव कर दिया है। अनेक मौलिक, अनूदित और संपादित रचनाएँ कीं हैं।

कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, Muzaffarpur के तत्त्वावधान में "प्रेरणा पर्व" का आयोजन
कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, Muzaffarpur के तत्त्वावधान में “प्रेरणा पर्व” का आयोजन

डॉ पुष्पा गुप्ता (पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष, महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर ) ने डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह के रचना – पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी कृति बोलती है। उनके ऊपर शोधकार्य की आवश्यकता है।

रामवृक्ष बेनीपुरी महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ रामेश्वर राय ने उनके लेखकीय व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके संपर्क में आने पर पाठक लेखक बन जाता है। वे लेखकीय प्रेरणा के प्रदीप हैं।

कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, Muzaffarpur के तत्त्वावधान में "प्रेरणा पर्व" का आयोजन
कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, Muzaffarpur के तत्त्वावधान में “प्रेरणा पर्व” का आयोजन

रामदयालु सिंह महाविद्यालय के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह की साहित्य – साधना हिमगिरि की स्रोतस्विनी की तरह है जिससे साहित्यिक हरियाली निरंतर पोषित होती रहती है। बी आर ए बिहार विश्वविद्यालय की संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ निभा शर्मा ने कहा कि शब्द के सच्चे अर्थ में डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह एक साहित्यिक संत हैं।

“प्रेरणा पर्व “ का प्रारंभ अतिथियों के स्वागत, माल्यार्पण,दीप प्रज्वलन और स्वस्ति पाठ के द्वारा हुआ।

इस अवसर पर प्रथम सत्र में
डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह की रचनाधर्मिता पर आलेख पाठ का आयोजन हुआ जिसमें नागार्जुन उमेश मिश्र संस्कृत महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ रामसंयोग राय ने ” डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह का रचना – संसार” आलेख का पाठ किया। पूर्व चम्पारण के शिक्षक श्री अमरेंद्र कुमार झा ने ” डॉ राजेश्वर प्रसाद सिंह और उनका नारी विमर्श “ आलेख का पाठ किया। आर एम काँलेज सहरसा की प्राध्यापिका डॉ पिंकी कुमारी ने ” मैं भूखा हूँ : भूख की शाश्वतता का काव्य” का पाठ किया।

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महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ राकेश रंजन ने ” अक्षयवट: एक अप्रतिम नाट्य प्रयोग “ आलेख का पाठ किया। पूर्व राजभाषा अधिकारी पूर्व मध्य रेलवे के डॉ चंद्रदेव सिंह ने “माता, पत्नी, कन्या और अन्य कविताएँ : स्त्री विमर्श में हस्तक्षेप “ आलेख का पाठ किया।

अवकाश प्राप्त स्नातकोत्तर शिक्षक डॉ उमेशचंद्र त्रिपाठी ने” पहचान: एक विश्लेषण ” आलेख का पाठ किया। पूर्व विश्वविद्यालय हिंदी विभागाध्यक्ष, ललित नारायण मिश्र मिथिला विश्वविद्यालय के डा . राजेंद्र साह ने ” कृषक वेदना : कृषक त्रासदी का काव्य” का पाठ किया।

“प्रेरणा – पर्व” के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन हुआ जिसमें अनेक कवियों ने अपनी कविता का पाठ किया। डॉ रामेश्वर द्विवेदी ने” इस बार झूठ बोलूँगा।

डॉ पंकज कर्ण ने ग़ज़ल सुनायी ” उदासीके सफ़र में धूप को ओढा बिछाया है।

गीतकार डॉ चंद्रदेव सिंह ने अपने गीत ” आनेवाला नया साल क्या ये का वादा कर देगा , नये साल में आशाओं पर ग्रहण नहीं लगेगा” सुनाया।

प्रोफेसर डॉ पुष्पा गुप्ता ने ” फूलों की पंखुड़ियांँ बोले, है आज जन्मदिन तेरा ” का पाठ किया।

कवि श्रवण कुमार ने “आशा के ह्रदय मन में जलाए रखना “ का गायन किया। कविवर विनोद कुमार ने ” सूखी सहमी नाकों पर श्री कोंपल आने दो” का गायन किया ।

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रामेश्वर द्विवेदी ने की और मंच संचालन डॉ पंकज कर्ण ने किया। ।

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