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संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रांतीय सप्तशक्ति संगम बैठक गरिमामय व प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न

संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रांतीय सप्तशक्ति संगम बैठक संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रांतीय सप्तशक्ति संगम बैठक
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Muzaffarpur 1 February : संघ शताब्दी वर्ष के पावन एवं ऐतिहासिक अवसर पर लोक शिक्षा समिति, बिहार द्वारा आयोजित प्रांतीय सप्तशक्ति संगम बैठक दिनांक 1 फरवरी 2026 (रविवार, माघ पूर्णिमा) को प्रातः 10 बजे से अपराह्न 3 बजे तक भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदातपुर, मुजफ्फरपुर के प्रांगण में अत्यंत गरिमामय, अनुशासित एवं प्रेरणादायी वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। लगभग 150 शिक्षकों, कार्यकर्ताओं एवं संबद्ध संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रांतीय सप्तशक्ति संगम बैठक

बैठक का उद्देश्य संगठनात्मक समन्वय को सुदृढ़ करना, शैक्षणिक गुणवत्ता का संवर्धन करना तथा शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आगामी कार्ययोजनाओं पर विचार-विमर्श करना था। चर्चा में कुटुंब प्रबोधन, मूल्याधारित शिक्षा, डिजिटल शैक्षणिक उपकरणों का उपयोग तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कार्यक्रम शामिल रहे।

संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रांतीय सप्तशक्ति संगम बैठक
संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रांतीय सप्तशक्ति संगम बैठक

प्रशासनिक मार्गदर्शन एवं दायित्व

लोक शिक्षा समिति से संबद्ध संस्थान भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के विभाग निरीक्षक श्री राजेश रंजन जी की गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम में विशेष रूप से रही।
साथ ही, सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम के प्रभारी के रूप में विभाग निरीक्षक श्री ललित कुमार राय जी ने कार्यक्रम की समग्र व्यवस्था एवं समन्वय का दायित्व सफलतापूर्वक निभाया। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के कुशल मार्गदर्शन में कार्यक्रम अनुशासित, सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली ढंग से संपन्न हुआ।

मुख्य वक्ता का ओजस्वी उद्बोधन

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री अवनीश भटनागर जी ने अपने प्रेरणादायी एवं राष्ट्रभावना से ओतप्रोत उद्बोधन में कहा—

उन्होंने शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का सर्वाधिक प्रभावशाली माध्यम बताते हुए कहा कि विद्यालय और महाविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने वाले केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना के आधार स्तंभ हैं। उन्होंने संगठनात्मक एकता, समन्वित प्रयास तथा मूल्याधारित शिक्षा को समय की आवश्यकता बताया। उनका वक्तव्य उपस्थित शिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।

संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रांतीय सप्तशक्ति संगम बैठक
संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रांतीय सप्तशक्ति संगम बैठक

अध्यक्षीय उद्बोधन

बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. सुधा बाला जी (लोक शिक्षा समिति की पूर्व अध्यक्ष) ने अपने मार्गदर्शक एवं विचारोत्तेजक उद्बोधन में कुटुंब प्रबोधन के विषय को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा—

उन्होंने समाज में महिलाओं की भूमिका पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा कि विडंबना यह है कि जिस नारी को समाज में कई बार सीमित दृष्टि से देखा जाता है, वही नारी परिवार के संस्कारों की प्रथम शिल्पकार होती है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनाना है तो परिवारों को सुदृढ़ बनाना होगा, और परिवारों को सुदृढ़ बनाने के लिए मातृशक्ति का सम्मान, जागरण और सक्रिय सहभाग आवश्यक है।

उनका उद्बोधन मातृशक्ति के सम्मान, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण का सशक्त संदेश देने वाला रहा।

विशिष्ट उपस्थिति

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. पूजा जी, क्षेत्रीय संयोजक उपस्थित रहीं।
प्रांत सह-संयोजक के रूप में
श्रीमती सरोज कुमारी जी, प्रधानाचार्य, बालिका सरस्वती विद्या मंदिर, पूर्णिया
श्रीमती सिम्मी वर्मा जी, प्रधानाचार्य, बालिका सरस्वती विद्या मंदिर, सिवान
की गरिमामयी उपस्थिति रही।

संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रांतीय सप्तशक्ति संगम बैठक

संचालन

कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन डॉ. नूतन सिंह जी ने किया। वे सप्तशक्ति संगम की विभाग संयोजिका सह-सचिव एवं सरस्वती शिशु मंदिर, शिवहर की सचिव हैं।

महाविद्यालय परिवार की सक्रिय सहभागिता

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल जी की प्रेरणादायी उपस्थिति रही।
साथ ही डी.एल.एड. विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश चंद्र जी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम के अंतर्गत महाविद्यालय से
डॉ. मिन्नी कुमारी एवं डॉ. अनामिका रानी की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

महाविद्यालय के सभी संकाय सदस्य, कर्मचारी एवं संबद्ध विद्यालयों से आए शिक्षकगण पूर्ण उत्साह और सक्रिय सहभागिता के साथ उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उत्साहपूर्ण समापन

पूरे कार्यक्रम के दौरान संगठनात्मक एकता, अनुशासन, राष्ट्रभावना एवं शैक्षणिक प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी वातावरण बना रहा। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, शिक्षकों, कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। शताब्दी वर्ष की अन्य गतिविधियों हेतु संकल्प लिया गया l

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