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Bharti Teacher Training College वार्षिक कार्यशाला का दूसरा दिन

Bharti Teacher Training College वार्षिक कार्यशाला Bharti Teacher Training College वार्षिक कार्यशाला
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Muzaffarpur 14 May : आज दिनांक 14/05/2024 को Bharti Teacher Training College भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के वार्षिक कार्यशाला के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में लोक शिक्षा समिति के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री खयाली राम जी ने NEP का उपयोग और उसके विभिन्न पहलुओं के ऊपर एक विचार रखा ,जिसमें विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास , योजना की समीक्षा को समझाने के बहाने पूरे NEP को समझाने को कोशिश किया।

Bharti Teacher Training College वार्षिक कार्यशाला

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्य को विद्या भारती के लक्ष्य के साथ उसके अर्थ को समझाया और कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मर्म को विद्या भारती बहुत पहले ही शिक्षा जगत में अपने शिक्षकों को बताया है विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य के लिए । उन्होंने विद्यार्थियों को कक्षा कक्ष में अवसर देने के ऊपर बल दिया ताकि उन बच्चों का सही ढंग से क्रिटिकल थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग के तरफ सोच जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को विद्यालय में महाविद्यालय में ऐसा वातावरण देने के ऊपर कहा ताकि बच्चे अपने आपको खोलें, खुलकर बात करें उसके पास बोलने या एक्सप्रेस करने का एक अपना तरीका बन जाए ।

Bharti Teacher Training College वार्षिक कार्यशाला
Bharti Teacher Training College वार्षिक कार्यशाला

NEP में मातृ भाषा मे शिक्षा देने की बात की महत्ता बताया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति रोजगार सृजित करने के लिए कौशल विकास की भी बात को करता है और ऐसी शिक्षा होनी चाहिए । यह सत्र पूरी तरह से राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर केंद्रित रहा । दूसरा सत्र लोक शिक्षा समिति के प्रदेश सचिव श्री रामलाल सिंह जी ने कक्षा कक्ष की प्रशासनिक व्यवस्था को बखूबी बताया, उन्होंने कहा कि बच्चों को कक्षा कक्ष में सक्रिय और सहभागिता देना NEP का मूल उद्देश्य है ताकि बच्चे अपने लिए एक नए जीवन की आयाम को तलाश सके । उनके अंदर नए विचार आए अपनी बातों को वह लोगों के सामने व्यक्त कर पाए ताकि आने वाला भविष्य सुनहरा हो ।

आज का युग तकनीकी दक्षता को शिक्षा जगत में एक बेहतर मदद करने वाला विकल्प है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा देने का माध्यम रोचक और मनोरंजन होना नितांत आवश्यक है ,लेकिन उस विषय का मर्म रहना चाहिए, उसका इसका आकलन और मूल्यांकन होते रहना चाहिए, शिक्षा जगत में आत्मविश्वास शिक्षक- विद्यार्थियों दोनों की तरफ भरपूर होनी चाहिए और नियमों का पालन भी रहना चाहिए तभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देश के विद्यालय और महाविद्यालय में सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है।

तीसरा सत्र महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य राजेश कुमार वर्मा जी ने महाविद्यालय के कार्यों की समीक्षा और योजनाओं के साथ आज के कार्यशाला को कल तक के लिए विराम दिया जिसमें महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक कार्य करता उपस्थित थे ।

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