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LS College लंगट सिंह महाविद्यालय में भारतीय भाषा सम्मेलन का आयोजन

Service Regularization LS College लंगट सिंह महाविद्यालय में भारतीय भाषा सम्मेलन का आयोजन
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Muzaffarpur 21 March : 21 मार्च गुरुवार को LS College में भारतीय भाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका आयोजन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली और लंगट सिंह महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।

LS College में भारतीय भाषा सम्मेलन

कार्यक्रम का उद्घाटन बीआरएबीयू के कुलपति प्रो दिनेश चंद्र राय, जय प्रकाश विवि के कुलपति प्रो परमेंद्र कुमार वाजपेयी, एलएस कॉलेज के प्राचार्य प्रो ओम प्रकाश राय ने संयुक्त रूप से किया। भाषा सम्मेलन में एक दर्जन भाषाओं के भाषाविद और 500 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन चार सत्रों में हुआ।

LS College लंगट सिंह महाविद्यालय में भारतीय भाषा सम्मेलन का आयोजन
LS College लंगट सिंह महाविद्यालय में भारतीय भाषा सम्मेलन का आयोजन


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जेपी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो परमेंद्र कुमार वाजपेयी ने कहा कि LS College ने प्रतिभा का अंबार लगाया है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के विकास के लिए कई योजनाओं को धरातल पर उतारा है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शिक्षा नीति ने दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक शक्ति को सबसे कमजोर आर्थिक शक्ति बना दिया। आजादी आते-आते भाषा और शिक्षा के अलगाव ने हमें गुलाम बना दिया। मातृभाषा से मिली शिक्षा से हमें जीवन में अभय मिलता है। धर्म जोड़ता है, रिलीजन तोड़ता है। 1822 में देवेंद्रनाथ ठाकुर समेत 20 विद्वानों ने ब्रिटिश शासन से यह मांग की थी। उन्होंने कहा कि एक भाषा या एक बोली मरती है तो एक संस्कृति का विनाश होता है।


बिहार यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो दिनेश चन्द्र राय ने कहा कि जो देश अपनी तासीर छोड़ देता है। वह पीछे चला जाता है। आजादी के बाद हमने मातृभाषा के साथ अन्याय किया है। अब वक्त है उससे सबक लेने का। मातृभाषा में पढ़ी बातें लम्बे वक्त तक स्मरण रहता है।


प्रो आतिश पराशर ने कहा कि इस विश्वविद्यालय की सुविधाओं को देखकर मेरा रोम-रोम रोमाचिंत हो रहा है। पत्रकारिता ने सर्वप्रथम भारतीय भाषाओं की क्षमताओं को निखारा और एक नई पहचान दी है।


लंगट सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य ओमप्रकाश राय ने कहा कि मातृ भाषा का कोई जवाब नहीं है। साहित्य के अलावे साइंस में भी अपनी भाषा में ही पढ़ाई होनी चाहिए। प्राचार्य ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों से हिंदी और अपनी मातृ भाषा को जीवनशैली में उतारने की शपथ दिलाई।


हिंदी विभाग के वरिष्ठ अध्यापक राजेश्वर पराशर ने कहा कि हम अपनी भाषाओं में उच्च शिक्षा पाकर सफलता के मीनार पर चढ़ सकते हैं। हमें मातृभाषा को व्यवहार में लाना होगा।
प्रो सतीश कुमार राय ने कहा कि भाषाएँ स्वाभाविक अभिव्यक्ति का जरिया है। भारतीय भाषाओं के महत्व को समझना है तो हिंदी, उर्दू को गहराई से समझें।


कार्यक्रम में काशी हिंदी वीवि वाराणसी के प्रो विवेकानंद उपाध्याय, मगध विवि के प्रो भारत सिंह, वीर कुंवर सिंह विवि के प्रो विश्वनाथ चौधरी, प्रो शारदा चरण, प्रो जयकांत सिंह, भागलपुर के प्रो शोभा कुमारी, छपरा के प्रो नागेंद्र शर्मा, प्रो राजीव कुमार झा का संबोधन हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रो राजीव कुमार और आचार्य डा शिवेंद्र ने किया।

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