Muzaffarpur 7 March : RDS College में एनएसएस इकाई और आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “जेंडर इनइक्वलिटी इन ग्लोबल पर्सपेक्टिव” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। मुख्य वक्ता के रूप में पटना विश्वविद्यालय की सोशल साइंस की डीन डॉ. शेफाली राय ने भाषा और लैंगिक असमानता के संबंध पर विस्तार से प्रकाश डाला।
RDS College में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
RDS College के एनएसएस इकाई व आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “जेंडर इनइक्वलिटी इन ग्लोबल पर्सपेक्टिव” विषय पर श्री कृष्ण सभा भवन में आयोजित परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में पटना विश्वविद्यालय पटना के सोशल साइंस के डीन डॉ शेफाली राय ने कहा कि लैंगिक असमानता और भाषाई बोध के बीच गहरा संबंध है। हिंदी भाषाओं में व्याप्त संरचनात्मक लिंग भेद लैंगिक रूढ़िवादिता को मजबूत करते हैं और असमानता को बढ़ावा देते हैं।

भाषा सिर्फ संचार का साधन नहीं बल्कि यह लैंगिक पूर्वाग्रहों का वाहक भी है: डॉ शेफाली राय
महिलाओं के संदर्भ में उन्होंने कहा कि महिलाओं को अक्सर रिश्तों की दृष्टि से भावनात्मक रूप से बात करने वाला माना जाता है, जबकि पुरुषों की भाषा में मुखरता और भावनाओं को दबाने की प्रवृत्ति देखी जाती है। भाषाई संरचनाएं यह तय करती है कि हम पुरुषों और महिलाओं को कैसे देखते हैं।

अनुसंधान से पता चलता है कि अधिक लिंग आधारित भाषा वाले समाजों में कम लिंग आधारित भाषा वाले समाजों की तुलना में अधिक लैंगिक असमानता पाई जाती है। भाषा सिर्फ संचार का साधन नहीं है, बल्कि यह लैंगिक पूर्वाग्रहों का वाहक भी है। लिंग समावेशी भाषा का प्रयोग अति आवश्यक है इससे समाज में महिलाओं और विविध जेंडर की पहचानों को सशक्त बनाने की दिशा में बल मिलता है।

अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ शशि भूषण कुमार ने कहा कि लैंगिक असमानता का तात्पर्य है लिंग के आधार पर अवसरों, अधिकारों और संसाधनों तक पहुंच में भेदभाव से है, जो शिक्षा, आय और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है।
डॉ नीलिमा झा ने फिल्मों में लैंगिक असमानता के प्रमुख पहलू पर प्रकाश डाला।
लैंगिक असमानता पर शिक्षकों और छात्रों ने वक्ता से पूछे कई सवाल:
प्रश्न पूछने वालों में डॉ नीरज मिश्रा, डॉ सौरभ राज, डॉ रजनीकांत पांडे एवं कई छात्रों ने पूछे महत्वपूर्ण सवाल।
*लैंगिक असमानता और लैंगिक समानता में क्या अंतर है?
*समाज में लैंगिक रूढ़ियों का बच्चों के विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है?
*पारंपरिक पितृ सत्तात्मक सोच किस प्रकार महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकती है।
समस्तीपुर,बिहार के अभिषेक की मेहनत रंग लाई: स्वाध्याय से UPSC में सफलता, परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर https://t.co/mBjxyK1LSw #UPSC2026 #samastipur pic.twitter.com/MIlaQ1kjS4
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) March 6, 2026
मौके पर सिंडिकेट सदस्य डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता, सीनेट सदस्य डॉ संजय कुमार सुमन, डॉ एम एन रजवी, डॉ आर एन ओझा, डॉ नीलिमा झा, डॉ आशुतोष मिश्रा, डॉ राजेश कुमार, डॉ आलोक त्रिपाठी, डॉ भगवान कुमार, डॉ नीरज मिश्रा, डॉ आनंद प्रकाश दुबे, डॉ रजनीकांत पांडे, डॉ हसन रजा, डॉ सौरभ राज, डॉ ललित किशोर, डॉ विकास कुमार, डॉ अमीता त्रिवेदी, डॉ आयशा जमाल, डॉ पूजा लोहान एवं छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
मंच संचालन व विषय प्रवेश डॉ श्रुति मिश्रा ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ अनुराधा पाठक ने किया।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।