Muzaffarpur 30 September : RDS College में रश्मिरथी के 75 वर्ष पर संगोष्ठी हुई। मदन कश्यप ने दिनकर की कविता में जातिवाद के बजाय मानव योग्यता की प्रतिष्ठा पर चर्चा की।
RDS College में ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूरे होने पर संगोष्ठी, कविता के बदलावकारी प्रभाव और सामाजिक चेतना पर हुई चर्चा
“रश्मिरथी में दिनकर ने जातिवाद-सम्प्रदायवाद की बजाय मनुष्य की तेज व योग्यता की प्रतिष्ठा की”
‘हिन्दी पखवाड़ा’ और ‘रश्मिरथी’ के पचहत्तर वर्ष पूरे होने पर रामदयालु सिंह महाविद्यालय के स्नातकोतर हिन्दी विभाग के तत्वावधान में ‘हिन्दी कविता का जनमानस में बदलावकारी प्रभाव व चेतना का विस्तार’ (विशेष संदर्भ रामधारी सिंह दिनकर की रश्मिरथी) विषयक आयोजित संगोष्ठी में प्रख्यात कवि व विचारक मदन कश्यप ने मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए उक्त बातें कही। अपने वक्तव्य के क्रम में आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि दिनकर ने आने वाले समय के संकट को पहले ही पहचान लिया था, इसीलिए पचहत्तर साल पहले अपनी ‘रश्मिरथी’ काव्य-कृति के माध्यम से जातिवाद आदि के प्रश्न को गहरे सरोकार से उठाया और उसके बरक्स मनुष्य के तेज व योग्यता की पुनर्प्रतिष्ठा की।

उन्होंने यह भी कहा कि आज पचहत्तर साल बाद ‘रश्मिरथी’ के पुनर्पाठ की जरूरत है, क्योंकि कई बार किसी कृति के लोकप्रिय पाठार्थ के कारण उसका अन्यार्थ अदेखा-समझा रह जाता है। वास्तव में दिनकर कलात्मक पारदर्शिता के कवि हैं। उनकी कविता सहज एकस्तरीय लगती हुई भी, बहुस्तरीय है और उसकी कई अर्थछवियाँ हैं। ‘रश्मिरथी’ को भी इसी संदर्भ में देखना-समझना चाहिए।

अपने अध्यक्षीय भाषण में हिन्दी विभागाध्यक्ष व साहित्यकार प्रो.रमेश प्रसाद गुप्ता ने पहले तो अपने विभाग के पूर्ववर्ती छात्र कवि मदन कश्यप के काव्य-विकास व वैशिष्ट्य एवं महत्व को उल्लेखित किया और छात्रों को उनसे प्रेरणा लेने को कहा। तत्पश्चात सम्बन्धित विषय के संदर्भ में कहा कि कविता वाकई बड़ा असरकारी काम करती है और कवि कई बार अपने विरुद्ध खड़ा होता है। निस्सन्देह कवि दिनकर की ‘रश्मिरथी’ अपनी रचना के पचहत्तर वर्ष में पूरे हिन्दी प्रक्षेत्र के जनसामान्य पर परिवर्तनकारी प्रभाव डाला और उसकी परम्परित चेतना में परिष्कार किया है।
Sitamarhi के RSS Science College में NEP 2020 पर उन्मुखीकरण कार्यक्रम हुआ। पाठ्यक्रम, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और मूल्यांकन पर चर्चा हुई। https://t.co/QOOXPIvkLc #sitamarhi @brabu_ac_in pic.twitter.com/GBBbCyeKVj
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संगोष्ठी का विषय-प्रवेश डॉ.नीरज कुमार मिश्र करते हुए सामाजिक परिवर्तन में कविता के प्रभावों की संक्षेप में चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन व अतिथियों का स्वागत डॉ.मनोज कुमार सिंह एवं धन्यवाद-ज्ञापन डॉ.दिव्या ने किया।
Muzaffarpur में शिक्षक संवाद, प्रो. संजय कुमार सिंह ने शिक्षकों की समस्याओं को सदन तक पहुंचाने का दिया भरोसा https://t.co/2xPDU6n6KQ #mlc #Muzaffarpur pic.twitter.com/dx30Uac7Uc
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कार्यक्रम में काफी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाऍं एवं छात्र-छात्राऍं उपस्थित रहीं; जिनमें डॉ.एम.एन.रजवी, डॉ.रजनीकांत पाण्डेय, डॉ.प्रियंका दीक्षित, डॉ.श्रुति मिश्र, डॉ.अनुराधा पाठक, डॉ.आशुतोष मिश्र, डॉ.नियाज अहमद, डॉ.हसन रजा, डॉ.अमर ज्योति रंजन, डॉ.भगवान कुमार, डॉ.आरती कुमारी, डॉ.स्नेहलता, डॉ.संध्या कुमारी, डॉ.बिन्दु कुमारी, डॉ.अमृता कुमारी, डॉ.सूरज कुमार, डॉ.विनोद कुमार, डॉ.चन्द्रकिशोर झा, डॉ.चौधरी संजय, डॉ.प्रवाल चटर्जी, डॉ.भैरवी, डॉ.आरती मिश्रा, डॉ.अपर्णा कुमारी, पुस्तकालयाध्यक्ष पूनम कुमारी आदि प्रमुख रहे।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।

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