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Saadi Shirazi “शेख़ सादी शीराज़ी की कालातीत प्रासंगिकता” विषय पर अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सम्मेलन

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Muzaffarpur 24 April : सादी दिवस पर “Saadi Shirazi सादी शीराज़ी की कालातीत प्रासंगिकता” विषय पर अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सम्मेलन का आयोजन

लंगट सिंह महाविद्यालय, मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार, भारत) और अक्सीर-ए दानिश एजुकेशन, राश्त (गीलान, ईरान) ने सादी दिवस पर “सादी शीराज़ी की कालातीत प्रासंगिकता” विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मेलन का आयोजन किया।

Saadi Shirazi “शेख़ सादी शीराज़ी “

Saadi Shirazi

Saadi Shiraz फ़ारसी साहित्य के एक महान कवि और विद्वान थे। उन्हें 13वीं सदी के फ़ारसी साहित्य जगत में सबसे महत्वपूर्ण शख्सियतों में से एक माना जाता है। “गुलास्तान” और “बोस्तान” उनकी दो सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ हैं जिनमे उन्होंने गद्य और पद्य में नीति कथाएँ, सामाजिक और राजनीतिक दर्शन और सैद्धांतिक, आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों को सरल, सुंदर और प्रभावशाली भाषा वियक्त किया है। उन की कविता “बनी आदम” संयुक्त राष्ट्र भवन के द्वार पर अंकित है जिसका सारांश यह है कि सारे मनुष्य एक ही शरीर के अंग जैसे हैं, क्यूंकि सब की उत्पत्ति एक ही स्रोत से हुई है। जिस तरह यदि शरीर के किसी अंग को कोई तकलीफ होती है तो पूरा शरीर उस दर्द को महसूस करता है उसी तरह हमें एक दूसरे के दुःख दर्द को महसूस करना चाहिए और अगर हम एक दूसरे के दुःख दर्द को महसूस नहीं कर सकते तो हमें मनुष्य कहलाने का अधिकारी नहीं है।

Saadi Shirazi "शेख़ सादी शीराज़ी
Saadi Shirazi “शेख़ सादी शीराज़ी

इस कार्यक्रम में भारत से प्रो. दिनेश चंद्र राय, कुलपति, बी. आर. आंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी, प्रो. ओम प्रकाश राय, प्रिंसिपल, लंगट सिंह विश्वविद्यालय, प्रो. राजीव कुमार, दर्शन विभागाध्यक्ष, लंगत सिंह विश्वविद्यालय, और डॉ. एस. नक़ी अब्बास (कैफ़ी), फ़ारसी विभागाध्यक्ष, लंगत सिंह विश्वविद्यालय और ईरान से प्रसिद्ध कवि, शोधकर्ता और आलोचक डॉ. इस्माइल अमीनी, डॉ. समाने इस्माइली, निदेशक, अक्सीर-ए दानिश एजुकेशन, राश्त (गीलान, ईरान) और प्रसिद्ध समकालीन कवित्री श्रीमती मरज़ियह फ़रमानी और श्रीमती नय्यरे जहाँबिन ने वियख्यान दिए और कविता पाठ किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मरज़ियह फ़रमानी ने Saadi Shiraz की कविताओं के साथ की और फिर अक्सीर-ए दानिश एजुकेशन की निदेशक डॉ. समाने इस्माइली ने स्वागत भाषण के साथ अभी विशिष्ट अतिथियों का परिचय और स्वागत किया और सम्मलेन के उदेश्यों पर प्रकाश डालते हुए लंगत सिंह विश्वविद्यालय और अक्सीर-ए दानिश एजुकेशन के बीच अकादमिक सहयोग समझौता के बारे बताया और विश्व साहित्य पर शेख़ सादी के प्रभाव पर बात की।

प्रो. दिनेश चंद्र राय, कुलपति, बी. आर. आंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी, ने लंगत सिंह और अक्सीर-ए दानिश एजुकेशन के बीच अकादमिक सहयोग समझौता की सराहना करते हुए कहा के इस तरह के अकादमिक सहयोग समझौतों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की पहचान बनेगी। उन्होंने शेख़ सादी के मानव दर्शन और संयुक्त राष्ट्र भवन पर अंकित उनकी कविता का उल्लेख करते हुए उनके विश्व साहित्य में विशिष्ट स्थान को रेखांकित किया।

उनके बाद प्रो. ओम प्रकाश राय, प्रिंसिपल, लंगत सिंह विश्वविद्यालय, ने वर्तमान विश्व की अशांत स्थिति में शांति और मानवीय मूल्यों के संदेशवाहक के रूप में शेख़ सादी की प्रासंगिकता पर बल दिया और लंगत सिंह विश्वविद्यालय और अक्सीर-ए दानिश एजुकेशन के बीच अकादमिक सहयोग समझौते का स्वागत करते हुए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं। प्रो. राजीव कुमार ने सम्मेलन के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए, शेख़ सादी की बहुआयामी प्रतिभा और उनके सामाजिक दर्शन को विस्तार से बताया। फिर मुख्य अतिथि डॉ. इस्माइल अमीनी ने फारसी भाषा और शेख़ सादी की कविताओं की विशेषताओं पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

उनके उपरांत डॉ. एस. नक़ी अब्बास (कैफ़ी) ने मुख्य वक्ता के रूप में भारत में शेख़ सादी की पांडुलिपियों और उनके कार्यों के भारतीय भाषाओं में अनुवादों पर चर्चा की। कार्यक्रम का समापन मरज़ियह फ़रमानी, नय्यरे जहाँबिन और डॉ. अब्बास द्वारा फारसी कविता पाठ के साथ हुआ, जो शेख़ सादी को श्रद्धांजलि थी। डॉ. समाने इस्माइली ने धन्यवाद ज्ञापन प्रेषित किया। उल्लेखनीय है के यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन लंगत सिंह विश्वविद्यालय और अक्सीर-ए दानिश एजुकेशन के अकादमिक सहयोग समझौता के तहत आयोजित तीसरा कार्यक्रम था।

यह सम्मेलन साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में भारत और ईरान के बीच सहयोग का एक सराहनीय उदाहरण है। शेख़ सादी शीराज़ी की रचनाओं का मानवता के लिए शाश्वत संदेश है, और इस तरह के सम्मेलन उनकी विरासत को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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