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RDS College में सेमिनार “21वीं सदी में शांति और संघर्ष समाधान में गांधी जी का महत्व” विषय पर

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Muzaffarpur 2 April : RDS College के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के तत्वावधान में आयोजित सेमिनार में “21वीं सदी में शांति और संघर्ष समाधान में गांधी जी का महत्व” विषय पर बोलते हुए गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, स्कूलऑफ़ सोशल साइंस के प्रोफेसर डॉ प्रिय रंजन कुमार ने कहा कि प्रकृति और मनुष्य में बेहतर तालमेल स्थापित होने से ही विश्व शांति कायम हो सकती है। यही विश्व शांति का मूल आधार है।

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प्रकृति और मनुष्य में बेहतर सामंजस्य स्थापित काल से ही विश्व शांति का मूल आधार है-डॉ प्रियरंजन कुमार

गांधी कहा करते थे कि प्रकृति हर मनुष्य की जरूरत को पूरा कर सकती है, किंतु प्रकृति मनुष्य के लालच को पूरा नहीं कर सकती है। विज्ञान मौजूद संकटों का कुछ न कुछ समाधान ढूंढ लेता है किंतु प्रकृति जब आक्रोश का इजहार करती है तो मानव कई तरह के संकटों से घिर जाता है। गांधी ने हिंसा और युद्ध को खत्म करने के लिए प्रकृति के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की वकालत की है।

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गांधी के विचारों पर चर्चा करते हुए बताया कि हिंसा से हिंसा का जन्म होता है। अहिंसा मानव का प्राकृतिक स्वभाव है। शांति की संस्कृति अपनाने की जरूरत है। कोई भी संस्कृति शांति का ही संदेश देती है। गांधी जी कहते हैं सत्य ही ईश्वर है अतः इस ईश्वरीय गुण को अपनाने की जरूरत है। दुनिया में किसी भी संघर्ष को सकारात्मक रूप में देखने से एवं विमर्श करने से समाधान निकल जाता है। मुख्य वक्ता ने विस्तार से गांधी के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं अन्य आयामों पर वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रकाश डाला।
बुस्टा महासचिव डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता ने कहा कि गांधी ने सत्याग्रह और अहिंसा रूपी अस्त्र का पहला प्रयोग चंपारण की धरती पर किया। इसी आंदोलन ने गांधी को महात्मा गांधी बनाया.

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अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ अनिता सिंह ने गांधी पर आयोजित व्याख्यान को शिक्षक और छात्र के लिए बहुत ही उपयोगी बताया। आगे उन्होंने कहा कि गांधी के विचारों ने दुनिया भर के लोगों को न सिर्फ प्रेरित किया बल्कि करुणा और शांति के दृष्टिकोण से भारत व दुनिया को बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाया।
कार्यक्रम में विषय प्रवेश कराते हुए डॉ संजय कुमार सुमन ने कहा कि 21वीं सदी में दुनिया में हो रहे उथल-पुथल की समाप्ति और शांति स्थापित करने की दिशा में गांधी के विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है।

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कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत इतिहास विभागाध्यक्षा डॉ कहकशां ने किया।


कार्यक्रम के दूसरे सत्र प्रश्नोत्तर काल में प्रो अजमत अली, छात्र अभिषेक, नितीश, ने विषय विशेषज्ञ से प्रश्न पूछे।
मंच संचालन डॉ एमएन रिजवी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ ललित किशोर ने किया।

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मौके पर डॉ कहकशां, डॉ संजय कुमार सुमन, डॉ एमएन रिजवी, डॉ नीलिमा झा, डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता, डॉ श्याम बाबू शर्मा, डॉ रामकुमार, डॉ प्रमोद कुमार, डॉ राजीव कुमार, डॉ अनुपम, डॉ अजमत अली, डॉ ललित किशोर, डॉ मनीष कुमार शर्मा, डॉ राकेश कुमार सिंह, डॉ मंजरी, डॉ रजनीकांत पांडे, डॉ श्रुति, डॉ गणेश कुमार शर्मा, डॉ आयशा जमाल, डॉ मनोज कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।

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