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RDS College के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में “Research Methodology in History” विषय पर सेमिनार

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Muzaffarpur 14 November : RDS College के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के तत्वावधान में “रिसर्च मेथोडोलॉजी इन हिस्ट्री” विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया

RDS College Seminar in History Department

RDS College के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में “Research Methodology in History” विषय पर सेमिनार
RDS College के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में “Research Methodology in History” विषय पर सेमिनार

रामदयालु सिंह महाविद्यालय के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के तत्वावधान में “रिसर्च मेथोडोलॉजी इन हिस्ट्री” विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ गौतम चंद्रा ने अपने संबोधन में ग्रीको-रोमन काल से उत्तर- आधुनिकता तक इतिहास के शोध पद्धति में आए परिवर्तन, निरंतरता और विकास क्रम को बताया। कहा कि इतिहास विषय में शोध पद्धति की शुरुआत हेरोडोटस की पुस्तक “द हिस्टोरीएस” से होती है, जब सर्वप्रथम मानव समाज के अतीत को लिखने हेतु स्रोत पर आधारित वस्तुनिष्ठ लेखन की वकालत की गई। परंतु मध्यकाल में चर्च और धर्म के प्रवाह में वस्तुनिष्ठता का स्थान आत्मनिष्ठता ने ले लिया।

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Dr Gautam Chandra

ऐतिहासिक शोध पद्धति का आधार: प्रत्यक्षवादी दर्शन, वैज्ञानिकता और वस्तुनिष्ठता है: गौतम चंद्रा

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19वीं सदी के दौरान विज्ञान के प्रभाव में जर्मन दार्शनिक रैंके ने ऐतिहासिक शोध में प्रत्यक्षवादी दर्शन की वकालत करते हुए तथ्य आधारित वस्तुनिष्ठ एवं वैज्ञानिक लेखन पर जोर दिया। इसी आलोक में मुख्य वक्ता ने शोधार्थियों को अपने शोध के अनुसार आर्काइव्ज, पुस्तकालय, जनगणना रिपोर्ट्स, गजेटियर एवं इंटरव्यू के माध्यम से प्राथमिक स्रोतों का अध्ययन कर वैज्ञानिक और मौलिक शोध करने पर बल दिया।

RDS College मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की अध्यक्षा डॉ रेणु कुमारी
RDS College मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की अध्यक्षा डॉ रेणु कुमारी

मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की अध्यक्षा डॉ रेणु कुमारी ने कहा कि शोध पद्धति से शोधकर्ता अपनी परियोजना को प्रबंधनीय, सुचारू और प्रभावी बनाए रखता है। शोध पद्धति के नवीन आयामों से शोधकर्ता शोध के वैज्ञानिक और विश्वसनीय प्रभाव को स्थापित करता है। अतः शोध पद्धति के वैज्ञानिक आधार को समझने की जरूरत है।

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इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ एम एन रजवी ने अंगवस्त्रम देकर अतिथियों का स्वागत किया और शोध पद्धति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अतीत को बदलने या मिटाने की शक्ति वर्तमान के पास नहीं है, लेकिन अतीत काल के घटनाओं की व्याख्या विभिन्न दृष्टिकोणों से होती रही है। इतिहास में शोध का उद्देश्य नए तथ्यों की खोज एवं स्थापित तथ्यों की पुनः व्याख्याओं के द्वारा मानवीय समाज के समक्ष सत्य की स्थापना के साथ ज्ञान में वृद्धि कर सभ्य समाज का निर्माण करना है।

RDS College के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में “Research Methodology in History” विषय पर सेमिनार
RDS College के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में “Research Methodology in History” विषय पर सेमिनार -Dr Anita Singh

सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ अनिता सिंह ने मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि का सम्मान किया और सारगर्भित व्याख्यान के लिए आभार प्रकट किया। कहा कि वक्ताओं के व्याख्यान ने इतिहास को समझने की दृष्टि पैदा की है। उन्होंने इतिहास विभाग के सभी शिक्षकों को सेमिनार के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने सैकड़ों की संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

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अन्य वक्ताओं में इतिहास विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक सह सीनेट सदस्य डॉ संजय कुमार सुमन, डॉ नीलिमा झा, डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता एवं डॉ सत्येंद्र प्रसाद सिंह ने भी शोध पद्धति के नवीन आयामों पर प्रकाश डाला।
सेमिनार में विषय प्रवेश डॉ अजमत अली, मंच संचालन डॉ ललित किशोर एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ मनीष कुमार शर्मा ने किया।

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मौके पर इतिहास विभाग के डॉ संजय कुमार सुमन, डॉ अजमत अली, डॉ ललित किशोर, डॉ मनीष कुमार शर्मा, डॉ अनुपम कुमार, डॉ सत्येंद्र प्रसाद सिंह, डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता, डॉ नीलिमा झा, डॉ राजीव कुमार, डॉ आनंद प्रकाश दुबे, डॉ रजनीकांत पांडे, डॉ प्रियंका दिक्षित, डॉ संजय कुमार चौधरी समेत सैंकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।