डॉ. अवधेश्वर अरुण का जन्म दिन बज्जिका दिवस के रूप में आयोजित

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Muzaffarpur 14 October : दिनांक 14 अक्टूबर 2022 को अरुणादित्य ट्रस्ट एवं तथागत सांस्कृतिक फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बज्जिका के महाकवि डॉ. अवधेश्वर अरुण के जन्म दिन के उपलक्ष्य पर बज्जिका दिवस सह महाकवि अवधेश्वर अरुण सम्मान समारोह का आयोजन स्थानीय अवधेश्वर अरुण गली, पड़ाव पोखर लेन नं.-3 स्थित अरुणादित्य ट्रस्ट
कार्यालय के सभागार में किया गया I

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ.रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि बज्जिका आज जिस गति से कार्यशील है, जल्द ही यह ज़न ज़न के बीच अपना आधार स्थापित हो जाएगी I समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए देवेन्द्र राकेश (राष्ट्रीय अध्यक्ष- बज्जीकांचल विकास पार्टी ) ने कहा कि बज्जीकांचल का बड़ा क्षेत्र है तथा हर विधा में लेखन हो रहा है और बज्जिका दिवस के अवसर पर महाकवि डॉ. अवधेश्वर अरुण का हम सब जन्म दिन मना रहे हैं I इसलिए भी कि वे बज्जिका रामायण के प्रणेता के साथ भाषाविद हैं I डॉ. संजय पंकज ने कहा कि कई छात्रों की पीढ़ियों का निर्माण करने वाले डॉ. अवधेश्वर अरुण बज्जिका और हिंदी के बड़े लेखक हैं, उनके जन्मदिन को बज्जिका दिवस के रूप में मनाना गणतंत्र का स्मरण और सम्मान है I उनकी सहजता और सादगी के हम सब कायल हैं I

डॉ. विद्या चौधरी ने कहा कि बज्जिका केवल मातृभाषा नहीं हमारा सम्मान है I अखोरी चन्द्रशेखर ने कहा कि दृढ़ राजनीतिक इक्षा शक्ति के अभाव के कारण इस भाषा को जो सम्मान मिलना चाहिए वह नहीं मिला I नेपाल से आये संजय साह मित्र ने कहा कि नेपाल के राजमार्ग से दक्षिण का पूरा भाग बज्जिका भाषा भाषियों का है I आज इस भाषा को बोलने वाले करोड़ों लोग हैं I उद्गार व्यक्त करने वालों में भूतपूर्व विधायक केदार प्रसाद गुप्ता, संस्कार भारती उत्तर बिहार के अध्यक्ष संजीव शर्मा, शिव कुमार साह, किशन दयाल श्रीकृष्ण, जियालाल यादव, मनमोहन सिंह मनोहर, राकेश पटेल, कुंदन कुमार, गोपाल जी किशोर आदि प्रमुख रहे I आयोजन में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. संजय पंकज, संजीव शर्मा रहे I


आयोजन में बज्जिका में निरंतर लेखन के लिए समर्पित डॉ. विद्या चौधरी (पटना), अखोरी चन्द्रशेखर ( हाजीपुर) एवं संजय साह मित्र (नेपाल) को पुष्प गुच्छ, शाल, सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न और पुस्तकें देकर महाकवि अवधेश्वर अरुण सम्मान से विभूषित करते हुए सम्मानित किया गया I स्वागत संबोधन एवं विषय प्रस्तावना डॉ. रणवीर कुमार राजन ने किया और बताया कि इस परम्परा की शुरुआत कई दशक पूर्व में हुई थी जो कोरोना काल में भी चलती रही I

संचालन के क्रम में डॉ. यशवंत ने कहा कि महाकवि अवधेश्वर अरुण के अवदान को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए यह ट्रस्ट संकल्पित है I धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कुमार आदित्य ने कहा कि इस गौरवमय आयोजन में आकर आपलोगों ने बज्जिका के विस्तार के लिए प्रेरित किया I इस अवसर पर विना अरुण, कामिनी राजन, हंस कुमार, विवेक वैभव, नचिकेत नमन, विनय सिन्हा, संतोष यादव, रौशन, शिव चंद्र साह आदि विद्वतजन उपस्थित रहे I

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