Headlines

Muzaffarpur News प्रो. (डॉ.) समीरण कुमार पॉल की कथा पुस्तक ‘कथा अरण्य’ का लोकार्पण

Muzaffarpur News प्रो. (डॉ.) समीरण कुमार पॉल Muzaffarpur News प्रो. (डॉ.) समीरण कुमार पॉल
Advertisements

Muzaffarpur 1 June : Muzaffarpur News में आज स्थानीय वीणा कंसर्ट के सभागार में समकालीन अंग्रेज़ी-हिंदी-बांग्ला साहित्य के उद्भट्ट विद्वान प्रो. (डॉ) समीरण कुमार पॉल की कथा पुस्तक ‘कथा अरण्य’ का लोकार्पण समारोह सम्पन्न हुआ जहाँ हिंदी कथा के सम्पूर्ण परिदृश्य पर विस्तार से बातें हुईं।

Muzaffarpur News प्रो. (डॉ.) समीरण कुमार पॉल

अध्यक्षता एवं लोकार्पण
करते हुए बिहार विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं चर्चित आलोचक प्रो. (डॉ) प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि लगातार क्षीण हो रहे पारंपरिक मूल्य, शहरीकरण का बढ़ता प्रभाव, नई पीढ़ी की आकांक्षाएँ और पारिवारिक संबंध जैसे विषयों पर लिखी गयी डॉ पॉल की कहानियाँ सजीव हैं। इन्होंने जिस बारीकी से इन परिवर्तनों को अपनी कहानियों में निरूपित किया है वह अनुकरणीय है। यह पुस्तक समय सापेक्ष है।

Muzaffarpur News प्रो. (डॉ.) समीरण कुमार पॉल

बिहार विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के अवकाश प्राप्त प्राध्यापक एवं लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार प्रो (डॉ) रवींद्र उपाध्याय ने कहा कि आज पाठकों के संकट से जूझ रहे काल मे डॉ पॉल की यह कथा पुस्तक पठनीयता की अभिरुचि को प्रबल करती दिखती है। सरल, सहज शब्दों में गूँथी गयीं ‘कथा-अरण्य’ की कहानियाँ स्पंदित करती हैं। इनकी कहानियाँ मन पर गहरा छाप छोड़ती है।

Muzaffarpur News प्रो. (डॉ.) समीरण कुमार पॉल

विशिष्ट अतिथि एवं लोकप्रिय रचनाकार डॉ संजय पंकज ने कहा कि डॉ पॉल द्वारा रचित ‘कथा अरण्य’ रचनात्मकता की गहनता और विस्तार लिए ठीक वैसा ही प्रतीत होता है जैसे विचारों का घना जंगल जिसमें सामाजिक बदलावों को सूक्ष्मता से महसूसा जा सकता है।

Muzaffarpur News प्रो. (डॉ.) समीरण कुमार पॉल

विशिष्ट अतिथि प्राध्यापक डॉ देवेंद्र कुमार दास ने कहा है कि आज के बदलते परिवेश में अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए यह कथा-संग्रह महत्वपूर्ण है। डॉ पॉल ने कहानियों के माध्यम से समकालीन समाज और जीवन का अनोखा चित्रण किया है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. कनुप्रिया, प्राचार्य, एम डी डी एम कॉलेज ने कहा कि डॉ पॉल द्वारा रचित ‘कथा-अरण्य’ जीवन के विविध रंगों और सामाजिक परिवर्तनों का साक्षी बन सकता है। इसमें जीवन और समाज का प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है।

स्वागत एवं विषय प्रवेश कराते हुए पुस्तक के लेखक प्रो (डॉ) समीरण कुमार पॉल ने अपने भावविह्वल उद्गार में कहा कि ‘कथा-अरण्य’ मेरी कहानियों का केवल संकलन मात्र नहीं बल्कि समाज और जीवन की बदलती तस्वीरों का जीवंत दस्तावेज़ है। इसमें वे कहानियाँ समाहित हैं जो हमें मानव जीवन के विभिन्न आयामों से रूबरू कराती हैं। यह हमें संवेदनाओं की गहराई में उतरने का अवसर देती हैं और आधुनिक जीवन की जटिलताओं पर भी प्रकाश डालती हैं।

मौके पर डॉ. देवब्रत प्रसाद ‘अकेला’, डॉ. डी. पी. दास, डॉ. कृष्णकांत झा, डॉ. रजनीश गुप्ता, डॉ. मधुर कुमार आदि ने भी डॉ पॉल की पुस्तक के विभिन्न आयामों पर अपना विचार व्यक्त किया।

समारोह को सफल बनाने में डॉ. रवि कुमार श्रीवास्तव, बिनोद कुमार बैठा, डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. राजीव झा, डॉ. संजीव कुमार मिश्रा, डॉ. उपेंद्र गामी, डॉ. जितेंद्र कुमार मिश्रा, हर्षवर्धन, रवि रंजन कुमार, डॉ. राजेश कुमार वर्मा, डॉ. अमृता मजूमदार, डॉ कल्पना अम्बष्ट, डॉ. राजीव रंजन, श्यामल श्रीवास्तव, डॉ. राजीव कुमार झा, डॉ. ऋचा दिलीप, अभिषेक डे सरकार, चित्तरंजन कुमार, डॉ. अनु, किशोर कुमार गुहा, शेओली भट्टाचार्या, आशुतोष कुमार, रोहित कुमार, संजीत कुमार शर्मा, रोशन श्रेष्ठ, ऋतम्भरा, सुनीता कुमारी, विकास कुमार, कैसर जावेद, राणा कर्मकार, उज्ज्वल कुमार दास, सुभाशीष बोस, अनीता कुमारी, अशोक कुमार गुप्ता, संतोष शेखर, ज्योत्सना कुमारी, डॉ राजेश ठाकुर, अमरनाथ चटर्जी आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

समारोह का आरंभ कवयित्री हेमा सिंह ने सरस्वती वंदना से किया। संचालन चाँदनी समर एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ सोनी सुमन ने किया।

You may also like to read…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *